श्रावण कृष्ण ग्यारस के दिन, दो महिलाओं के नेत्रदान से चार लोगों को मिलेगी नई नेत्र ज्योति
भवानीमंडी । ( जगदीश पोरवाल ) कभी-कभी ऐसी परिस्थितियों बन जाती है जिसके बारे में आदमी सोच भी नहीं सकता है । एक महिला का नेत्रदान प्राप्त करने के लिए बुलावे पर कोटा से शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम कोटा से भवानीमंडी आई लेकिन इसी दौरान पड़ोस में रहने वाली दूसरी महिला की भी मृत्यु होने के कारण उनके भी घर वालों की सहमति के बाद नेत्रदान करवाया गया । रविवार को ऐसा ही हुआ जब महज आधे घंटे में संपन्न हुए दो जोड़ी नेत्रदान से चार लोगों को नई नेत्रज्योति मिलेगी।
3 महीने पूर्व पिता रामगोपाल पालीवाल मृत्यु के बाद रविवार को सेवर माता रामकन्या बाई की मृत्यु होने पर पुत्र योगेश पालीवाल के द्वारा उनका भी नेत्रदान करवा कर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया गया।
वही दूसरी और तीन पुत्रीयों ने अपने माता कमला देवी चौहान के नेत्रदान करवा कर पुण्य और परोपकार का कार्य किया ।
भारत विकास परिषद के नेत्रदान प्रभारी एवं शाइन इंडिया फाउंडेशन के नगर संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल ने बताया कि रविवार सुबह योगेश पालीवाल की माता रामकन्या बाई पालीवाल को स्वास्थ्य समस्या हुई एवं राजकीय चिकित्सालय ले जाने पर वहीं पर उनका निधन हो गया, , ऐसे में पुत्र योगेश के द्वारा माता के नेत्रदान का निर्णय लिया गया एवं परिजनो की सूचना पर शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम ने ज्योति-रथ से भवानीमंडी पहुंचकर दोपहर 2 बजे नेत्रदान प्रक्रिया संपन्न करके कोर्निया प्राप्त किया।
आए थे एक महिला के नेत्रदान के लिए और हो गए दो महिलाओं के
जिस समय रामकन्या बाई की नेत्रदान प्रक्रिया संचालित हो रही थी उसी समय पड़ोस में महिला कमलाबाई चौहान का देहांत होने पर उपस्थित बेटियां पायल, प्रतिष्ठा एवं मोना तथा दामाद राजेश शर्मा ने माता के नेत्रदान के लिए स्वयं निवेदन किया,
आधे घंटे में दूसरा नेत्रदान
चूकि नेत्र उत्तसरण टीम के पास कोर्निया संकलन के दो किट थे, ऐसे में महज आधे घंटे में दूसरा नेत्रदान भी हो गया।
शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ कुलवंत गौड़ के अनुसार दोनों नेत्रदान से प्राप्त कॉर्निया उत्तम गुणवत्ता के पाए गए है, जिनको आई बैंक जयपुर भेज दिया गया है जहां पर प्रत्यारोपित होकर यह चार लोगों को नई रोशनी प्रदान करेंगे।
भवानीमंडी में अब तक हुए 161 व्यक्तियों नेत्रदान
नेत्रदान प्रभारी कमलेश गुप्ता दलाल के अनुसार शाइन इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से यह भवानीमंडी से 160 वां एवं 161 वां नेत्रदान प्राप्त हुआ है।

