आधुनिकता के मलबे से पाषाण युग की ओर लौटती मानवता

​जगदीश पोरवाल ( भवानीमंडी ) ​आज का विश्व जिस मोड़ पर खड़ा है, वह प्रगति की पराकाष्ठा नहीं बल्कि विनाश की पूर्व संध्या प्रतीत होती है। एक ओर हम अंतरिक्ष…

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