सेवा-समर्पण के प्रतीक, भवानीमंडी के कर्मयोगी स्व. दुर्गा प्रसाद पारेता को शहर ने अश्रुपूरित नेत्रों से दी श्रद्धांजलि



भवानीमंडी। (जगदीश पोरवाल )
निःस्वार्थ सेवा, अद्भुत कार्यकुशलता और समाज हित के प्रति अनन्य निष्ठा के प्रतीक भवानीमंडी के महान सपूत श्री दुर्गा प्रसाद पारेता गत 4 अगस्त को अनंत यात्रा पर प्रस्थान कर गए। उनके देवलोकगमन से संपूर्ण भवानीमंडी शहर शोक संतप्त है और एक अपूरणीय क्षति महसूस कर रहा है।

मूल रूप से ठेकेदारी व्यवसाय से जुड़े पारेता जी ने अपना पूरा जीवन सामाजिक संस्थाओं के उत्थान और कायाकल्प के लिए समर्पित कर दिया। यह मानो ईश्वर का वरदान ही था कि जिस भी संस्था से वह जुड़े—चाहे वह सैयद बाबा उर्स कमेटी पचपहाड़ सदर पद हो या श्री गोपाल गौशाला , गोपाल मंदिर , नागरिक सुरक्षा मोर्चा, नीलकंठ मुक्ति धाम हो या व्यापार महासंघ—वहां उन्होंने अपनी निष्ठा से नए प्राण फूंक दिए। पारेता जी की कार्यशैली अद्भुत थी; वे कहा करते थे कि “भूत बनकर काम मत करो, बल्कि काम को ही भूत बना दो।”

संस्थाओं के संचालन और सरकारी अनुदान, विधायक व सांसद निधि प्राप्त करने की कानूनी पेचीदगियों को दूर करने में उन्हें महारत हासिल थी। अपने इस पुनीत कार्य में वे सदैव श्री रामगोपाल राजा और अपने आत्मीय मित्र श्री प्रितपाल सिंह की सलाह से कागजी और कानूनी औपचारिकताओं को चुटकी में हल कर लेते थे।

श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित हुए शहर के गणमान्य नागरिक

शहर के इस महान कर्मयोगी को अंतिम नमन करने हेतु गुरुवार शाम को जैन बिल्डिंग में ‘नागरिक सुरक्षा मोर्चा’ एवं ‘व्यापार महासंघ’ के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा का कुशल संचालन प्रमोद जैन ‘पिंटू’ ने किया।
इस अवसर पर शहर के गणमान्य नागरिकों ने पारेता जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उनके जीवन के प्रेरक संस्मरणों पर प्रकाश डाला। सभा को संबोधित करने वालों में प्रमुख रूप से:

डॉ. जे.के. अरोड़ा, प्रितपाल सिंह एवं गिर्राज गुप्ता (पत्रकार)
कालू लाल सालेचा, विनय आस्तोलिया एवं चेतराज गहलोत
राजेश नाहर, ओम प्रकाश चतुर्वेदी एवं ओमप्रकाश गुप्ता (मातासारा वाला)
अरुण गर्ग, प्रकाश गुप्ता, लक्की मारवाड़ी, गोविंद भराड़िया एवं गोविंद बिरला आदि
उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि स्व. दुर्गा प्रसाद पारेता का जीवन भावी पीढ़ियों के लिए समाज सेवा का एक अमर अध्याय रहेगा। भवानीमंडी की धारा पर उनकी कार्यशैली और निस्वार्थ सेवा की छाप सदैव अमर रहेगी।

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