भवानीमंडी, ( जगदीश पोरवाल )07 अगस्त 2026
सिक्खों के आठवें गुरु, सभी दुखों को हरने वाले साहिब श्री गुरु हरकिशन साहिब जी महाराज के पावन प्रकाश पर्व को भवानी मंडी में बड़ी श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। गुरुद्वारा साहिब में आयोजित विशेष धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में संगत ने शिरकत की और गुरु साहिब के चरणों में नतमस्तक होकर सेवा का अवसर प्राप्त किया।
श्री गुरु हरकिशन साहिब जी का जन्म 7 जुलाई 1656 को कीरतपुर साहिब में सातवें गुरु श्री गुरु हर राय साहिब जी एवं माता कृष्ण कौर जी के घर हुआ था। मात्र पाँच वर्ष की अल्पायु में ही वे गुरुगद्दी पर विराजमान हुए और ‘बाल गुरु’ अथवा ‘बाला प्रीतम’ के नाम से विख्यात हुए।
मुस्लिम समुदाय ने उन्हें ‘बाला पीर’ की उपाधि दी थी
दिल्ली में जब चेचक और हैजे जैसी महामारी फैली, तब उन्होंने जाति-धर्म का भेदभाव त्यागकर रोगियों की निस्वार्थ सेवा की। यमुना किनारे पानी और औषधि वितरित कर उन्होंने हजारों पीड़ितों को राहत दी। उनकी इस सेवा से प्रभावित होकर दिल्ली के मुस्लिम समुदाय ने उन्हें ‘बाला पीर’ की उपाधि दी। सेवा करते हुए स्वयं चेचक से ग्रस्त होकर मात्र आठ वर्ष की आयु में 30 मार्च 1664 को वे ज्योति-जोत समा गए। अंतिम समय में उन्होंने “बाबा बकाला” कहकर नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की ओर इशारा किया। आज भी दिल्ली का गुरुद्वारा बंगला साहिब उनके सेवा-कार्य की जीवंत याद दिलाता है, जहाँ निरंतर निशुल्क चिकित्सा और लंगर की सेवा चलती है।
सच्ची सेवा और मानवता पद की मोहताज नहीं होती
आज के समय में गुरु साहिब का जीवन हमें याद दिलाता है कि सच्ची सेवा और मानवता किसी उम्र, पद या सीमा की मोहताज नहीं होती। उनकी शिक्षाएँ वर्तमान में भी बीमारी, संकट और असमानता के दौर में निस्वार्थ सेवा, सत्य और धर्म की रक्षा का मार्ग प्रशस्त करती हैं।
प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में श्री सुखमनी साहिब जी और दुःख भंजनी साहिब जी का लड़ीवार पाठ अनवरत रूप से चल रहा था। आज श्री सप्ताह पाठ साहिब की समाप्ति गुरु सिख परिवार की तरफ से हुई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गुरुद्वारा साहिब के सचिव श्री अमनदीप सिंह जी ने कहा कि गुरु हरकिशन साहिब जी ने न केवल सिक्खों को सेवा का मार्ग दिखाया, बल्कि अन्याय के सामने सिर झुकाने से इंकार कर मानवता, सत्य और धर्म की रक्षा के लिए सभी को प्रेरणा भी दी।
इस अवसर पर गुरुद्वारा साहिब में भव्य दीवान सजाया गया। हजूरी रागी भाई सतनाम सिंह जी एवं भाई हरकीरत सिंह जी के जत्थे द्वारा गुरबाणी के शब्द-कीर्तन, नाम-बाणी एवं कथा-कीर्तन प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम का समापन “सर्वत के भले” की अरदास के साथ हुआ। इसके पश्चात् हाथ प्रसादी लंगर संगत को वितरित किया गया।

