​झालावाड़ की पारंपरिक हथकरघा कला को राष्ट्रीय पहचान दिला रही ‘सांवरिया सेठ हथकरघा फाउंडेशन सोसाइटी’

जिला कलक्टर ने असनावर स्थित सोसाइटी का किया निरीक्षण; महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों की मुक्तकंठ से की प्रशंसा

झालावाड़, ( जनसंदेश न्यूज़ ) 01 अगस्त।

झालावाड़ जिले की असनावर स्थित सांवरिया सेठ हथकरघा फाउंडेशन सोसाइटी पारंपरिक कला को नया जीवन देने और ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी बनाने में एक मिसाल बनकर उभर रही है। शुक्रवार को जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ ने सोसाइटी परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने यहाँ जारी हथकरघा उत्पादों, हैंडब्लॉक प्रिंटिंग के नवाचारों और महिला सशक्तिकरण के प्रयासों का अवलोकन कर उन्हें सराहा।

​निरीक्षण के दौरान जिला कलक्टर ने बुनकरों और कार्यरत महिलाओं से सीधी बातचीत कर उत्पादन प्रक्रिया, डिजाइनों और विपणन व्यवस्था की पूरी जानकारी ली।

​समाचार के मुख्य बिंदु

  • महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण: सोसाइटी वर्तमान में लगभग 50 ग्रामीण महिलाओं को सीधा रोजगार प्रदान कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही है।
  • विशिष्ट और पारंपरिक उत्पाद: यहाँ तैयार होने वाली गागरोनी तोता साड़ी, गागरोनी तोता बेडशीट, सिंगल व डबल खेस, टॉवल और हैंडब्लॉक प्रिंटेड बेडशीट्स में स्थानीय कला एवं संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती है।
  • पर्यावरण संरक्षण और रीसाइक्लिंग: महिलाओं द्वारा अखबार की रद्दी (वेस्ट पेपर) से हैंड बैग, मोबाइल बैग और अन्य उपयोगी वस्तुएं बनाने की पहल की कलक्टर ने विशेष रूप से सराहना की।
  • राज्य व जिला स्तर पर पहचान:
    • वर्ष 2025: गागरोनी तोता साड़ी के लिए बुनकर श्री सुजानमल को राज्य स्तरीय बुनकर पुरस्कार में द्वितीय पुरस्कार मिला।
    • इस वर्ष: गागरोनी तोता साड़ी के उत्कृष्ट निर्माण के लिए श्रीमती गीता बाई को प्रथम जिला स्तरीय बुनकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

​”सोसाइटी का कार्य जिले के लिए गौरव का विषय” — जिला कलक्टर

अजय सिंह राठौड़ (जिला कलक्टर, झालावाड़):

“सांवरिया सेठ हथकरघा फाउंडेशन सोसाइटी पारंपरिक कला के संरक्षण, ग्रामीण महिला रोजगार और पर्यावरण हितैषी रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में दूरदर्शी सोच के साथ कार्य कर रही है। बुनकरों को मिले राज्य और जिला स्तरीय सम्मान इनकी गुणवत्ता और निष्ठा का स्पष्ट प्रमाण हैं। स्थानीय संसाधनों का सदुपयोग करते हुए रोजगार सृजन की यह पहल अत्यंत प्रशंसनीय है।”

​विपणन और प्रशिक्षण को और मजबूत करने के निर्देश

​निरीक्षण के अंत में जिला कलक्टर ने अधिकारियों व सोसाइटी पदाधिकारियों को निर्देश दिए कि उत्पादों के मार्केटिंग (विपणन), डिज़ाइन डेवलपमेंट और ट्रेनिंग गतिविधियों को और अधिक सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सोसाइटी झालावाड़ की कला को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी एक नई पहचान दिलाएगी।

​इस अवसर पर संबंधित विभागीय अधिकारी, सोसाइटी के पदाधिकारी, बुनकर एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला कार्यकर्ता मौजूद रहीं।

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