26 कांग्रेस, 13 भाजपा, 1 निर्दलीय: भवानीमंडी में कांग्रेस का स्पष्ट बहुमत

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40 वार्डों के नतीजों ने बदला शहर का राजनीतिक समीकरण, 14 वार्डों में मुकाबला 100 से कम वोट के अंतर से

भवानीमंडी। (जगदीश पोरवाल)
नगर पालिका चुनाव के परिणामों ने भवानीमंडी की राजनीति की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। 40 वार्डों में कांग्रेस ने 26 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि भाजपा को 13 सीटों पर संतोष करना पड़ा। वार्ड 29 में निर्दलीय अरबाज मंसूरी की जीत ने परिणाम में तीसरा कोण भी बनाए रखा।
बहुमत का आंकड़ा 21 होने के बावजूद कांग्रेस ने उससे 5 सीट अधिक हासिल की हैं। इसलिए बोर्ड गठन के लिहाज से कांग्रेस की स्थिति मजबूत है। अब चुनावी मुकाबले के बाद राजनीतिक चर्चा का केंद्र अध्यक्ष पद और कांग्रेस के भीतर संभावित दावेदारों पर रहेगा।

  1. कांग्रेस की जीत कितनी बड़ी?
  2. 26-13 का आंकड़ा सामान्य बहुमत से आगे की तस्वीर पेश करता है। कांग्रेस ने भाजपा के मुकाबले 13 सीट अधिक जीती हैं। 2021 के पिछले बोर्ड में दोनों प्रमुख दलों के बीच लगभग बराबरी का मुकाबला रहा था, लेकिन इस बार परिणाम एकतरफा दिशा में चला गया।

कांग्रेस की 26 सीटों में कई वार्डों में जीत का अंतर भी मजबूत रहा। वार्ड 31 में मोहम्मद अजमल ने 397 वोट, वार्ड 28 में सफिया ने 354 वोट, वार्ड 3 में उल्लास बाई ने 289 वोट और वार्ड 23 में पिंकी गुर्जर (पूर्व नपा अध्यक्ष )ने 181 वोट के अंतर से जीत दर्ज की।
यह केवल सीटों की संख्या नहीं, बल्कि कई वार्डों में मजबूत जीत की ओर भी संकेत करता है।

  1. भाजपा की हार, लेकिन पूरी तरह सफाया नहीं

भाजपा 13 वार्डों में जीत दर्ज करने में सफल रही। उसके लिए वार्ड 7 में रणजीत सिंह की 236 वोट की जीत, वार्ड 9 में सुनीश दीक्षित की 263 वोट की जीत, वार्ड 38 में अमित चतुर्वेदी की 166 वोट की जीत और वार्ड 26 में महेंद्र सिंह परिहार की 131 वोट की जीत उल्लेखनीय रही।
अर्थात भाजपा कई वार्डों में मजबूत रही, लेकिन वह अपने मजबूत वार्डों की संख्या को व्यापक जीत में परिवर्तित नहीं कर सकी।

  1. सबसे रोचक बात—कांटे के मुकाबले

परिणामों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कई वार्डों में दोनों प्रत्याशियों के बीच अंतर बहुत कम रहा।
वार्ड 1 — भाजपा की जीत 6 वोट
वार्ड 13 — कांग्रेस की जीत 9 वोट
वार्ड 2 — भाजपा की जीत 20 वोट
वार्ड 35 — कांग्रेस की जीत 30 वोट
वार्ड 18 — भाजपा की जीत 32 वोट
वार्ड 16 — कांग्रेस की जीत 33 वोट
वार्ड 17 — कांग्रेस की जीत 48 वोट
वार्ड 19 — भाजपा की जीत 51 वोट
वार्ड 39 — भाजपा की जीत 53 वोट
वार्ड 27 — कांग्रेस की जीत 56 वोट

इससे साफ है कि कई वार्डों में मुकाबला बेहद करीबी रहा। यानी आज जो सीट किसी दल के खाते में है, वहां अगले चुनाव में समीकरण बदलने की गुंजाइश बनी हुई है।

  1. सबसे बड़ी जीत और सबसे छोटी जीत
    सबसे बड़ी जीत:
    वार्ड 31 में कांग्रेस के मोहम्मद अजमल ने भाजपा के अल्पेज खान को 397 वोट से हराया।
    दूसरी बड़ी जीत:
    वार्ड 28 में कांग्रेस की सफिया ने भाजपा की अफसाना बिस्ती को 354 वोट से हराया।
    सबसे करीबी मुकाबला:
    वार्ड 1 में भाजपा के वैभव कुमार ने कांग्रेस के विकास जैन को सिर्फ 6 वोट से हराया।
    वार्ड 13 में भी कांग्रेस की शमशाद बी की जीत भाजपा की शबाना बी पर केवल 9 वोट की रही।
  2. कांग्रेस की महिला पार्षदों की मजबूत मौजूदगी
    कांग्रेस की जीत में महिला प्रत्याशियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। उल्लास बाई, शामू बाई, शकीना बी, शमशाद बी, दुर्गा/भैरू लाल, पिंकी गुर्जर, शांति देवी, दीप माला गोचर, सफिया, शकीना बी बाई और सुनिता शर्मा सहित कई महिला प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की।
    भाजपा की ओर से भी कृष्णा कुमारी, तेज कुंवर बाई और यशोदा बाई जैसी प्रत्याशियों ने जीत हासिल की।
  3. वार्ड 20 का परिणाम भी चर्चा में
    वार्ड 20 विशेष रूप से राजनीतिक चर्चा में रहेगा। कांग्रेस की संगीता आस्तोलिया को भाजपा की यशोदा बाई ने 98 वोट से हराया।
    यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस के नगर अध्यक्ष विनय कुमार आस्तोलिया ने वार्ड 30 में भाजपा प्रत्याशी को 86 वोट से हराकर जीत दर्ज की। यानी एक ही राजनीतिक परिवार से जुड़े दो वार्डों में परिणाम अलग-अलग दिशा में गए।
  4. वार्ड 29 ने तीसरा रास्ता दिखाया
    वार्ड 29 में दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशी जीत हासिल नहीं कर सके। यहां निर्दलीय अरबाज मंसूरी ने 125 वोट लेकर जीत दर्ज की।

आंकड़ों में कांग्रेस के अख्तर अली को 118 और भाजपा के मोहम्मद अनीस को 109 वोट मिले। इससे पता चलता है कि इस वार्ड में मतदाताओं ने दोनों प्रमुख दलों के बजाय निर्दलीय विकल्प को चुना।

  1. अध्यक्ष पद का गणित कांग्रेस के पक्ष में

अब सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल अध्यक्ष पद का है।
कांग्रेस के पास 26 पार्षद हैं। अध्यक्ष चुनने के लिए आवश्यक बहुमत 21 है। कांग्रेस के पास बहुमत से 5 अधिक पार्षद हैं।
इसलिए निर्दलीय अरबाज मंसूरी का समर्थन कांग्रेस के लिए अनिवार्य नहीं है। हां, राजनीतिक दृष्टि से निर्दलीय पार्षद की भूमिका आगे भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
अब असली मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच चुनावी मैदान से निकलकर कांग्रेस के भीतर अध्यक्ष पद के चेहरे के चयन पर आ गया है।

  1. परिणाम से निकलता सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश
    इस चुनाव का सबसे बड़ा संदेश यह है कि भवानीमंडी के मतदाताओं ने इस बार वार्ड स्तर पर अलग-अलग फैसले किए हैं।

कहीं मामूली अंतर से जीत मिली तो कहीं 300 से अधिक वोटों की बढ़त। इससे यह भी संकेत मिलता है कि नगर निकाय चुनाव में स्थानीय प्रत्याशी, परिवार, व्यक्तिगत संपर्क, वार्ड की स्थानीय समस्याएं और बूथ स्तर का नेटवर्क बड़े राजनीतिक नारों से अधिक प्रभावी हो सकते हैं।

भवानीमंडी में 2026 का चुनाव कांग्रेस के लिए सत्ता की वापसी से आगे बढ़कर मजबूत बोर्ड बनाने का जनादेश है। 26 सीटों के साथ कांग्रेस के पास बोर्ड संचालन की पर्याप्त ताकत है। भाजपा के 13 पार्षद विपक्ष की भूमिका में होंगे, जबकि एक निर्दलीय पार्षद अलग राजनीतिक पहचान के साथ सदन में पहुंचेगा।

अब चुनाव खत्म हो चुका है, लेकिन भवानीमंडी की अगली राजनीतिक कहानी शुरू हो गई है—26 पार्षदों वाली कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी पर किसे बैठाती है, यही अगला बड़ा सवाल है।

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