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भवानीमंडी (जगदीश पोरवाल)
देश को आज़ाद हुए 79 वर्ष बीत जाने के बाद भी ग्रामीण अंचलों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रहा है। भवानीमंडी उपखंड के ग्राम गुराडिया भ्रता में प्रशासनिक उपेक्षा का एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहाँ महज़ एक किलोमीटर सड़क न बनने के कारण स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को हर दिन नारकीय स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुँचने की मजबूरी
ग्राम गुराडिया भ्रता स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय (12वीं तक) में मालीखेड़ा गाँव के विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते हैं। स्कुल आने वाले बच्चों को परेशानी उठानी पड़ रही है। लगभग एक किलोमीटर लंबे कच्चे और कीचड़ भरे रास्ते के कारण बारिश के मौसम में यह मार्ग बेहद फिसलनभरा हो जाता है।
”कीचड़ और फिसलन के कारण छोटे-छोटे बच्चों के गिरने और चोटिल होने का डर लगातार बना रहता है। बारिश में कपड़े और बस्ते खराब होना आम बात हो गई है।”
— स्थानीय ग्रामीण
कागजी पचड़ों में अटका निर्माण:
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बोल
सुरेश कुमार (सरपंच प्रतिनिधि, गुराडिया माना):
”मालीखेड़ा से गुराडिया भ्रता तक की इस कच्ची सड़क के निर्माण के लिए लगभग एक वर्ष पूर्व पंचायत समिति के विकास अधिकारी (बीडीओ) को लिखित आवेदन दिया गया था। अधिकारियों को समस्या से अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।”
कालूराम मेघवाल (विधायक, डग क्षेत्र):
”मुझे इस सड़क के कच्चे होने की जानकारी नहीं थी। मैं मामले का संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों से चर्चा करूँगा और जल्द ही आवश्यक कार्रवाई करवाई जाएगी।”
ग्रामीणों की मुख्य मांगें
सड़क का शीघ्र निर्माण: मालीखेड़ा से गुराडिया भ्रता तक 1 किलोमीटर लंबे रास्ते को प्राथमिकता के आधार पर पक्का किया जाए।
सुरक्षित आवागमन: विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस बरसात के मौसम में त्वरित राहत कार्य शुरू हो।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि यदि जल्द ही इस 1 किलोमीटर सड़क का निर्माण शुरू नहीं कराया गया, मालीखेड़ा के विद्यार्थियों का भविष्य और सुरक्षा यूँ ही दांव पर लगी रहेगी।

