भवानीमंडी। राजनीति में कब किसकी किस्मत का सितारा चमक जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। इसे राजनीतिक गणित कहें या किसी का प्रबल ‘राजयोग’, लेकिन भवानीमंडी नगर पालिका चुनाव के इस घटनाक्रम ने हर किसी को हैरान कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए एक परिवार ने महज 18 दिनों के भीतर न केवल चुनाव में जीत हासिल की, बल्कि नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया।
पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 27 अक्टूबर को नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ हुई थी। 28 अक्टूबर को रक्षाबंधन का अवकाश रहा और 29 को फिर से नामांकन भरे गए। 30 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश के दिन शाम को एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर हुआ। भाजपा से नाराज चल रहे पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रामलाल गुर्जर अपने परिवार के साथ डग विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी चेतराज गहलोत के भवानी रिजॉर्ट पहुंचे और कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली।
राजनीतिक चमत्कार की असली तस्वीर 31 अक्टूबर को नामांकन के अंतिम दिन दिखाई दी, जब कांग्रेस में शामिल हुए अभी 24 घंटे भी नहीं हुए थे और पार्टी ने रामलाल गुर्जर के परिवार के तीन सदस्यों को अपना प्रत्याशी घोषित कर टिकट दे दिया।
इसके बाद 9 सितंबर को नगर पालिका चुनाव का मतदान संपन्न हुआ। 14 सितंबर को आए चुनाव परिणामों में जनता का जनादेश भी इस परिवार के पक्ष में रहा और तीनों ही सदस्य विजयी घोषित हुए। जीत का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा—16 सितंबर को नगर पालिका अध्यक्ष पद के नामांकन के अंतिम दिन रामलाल गुर्जर परिवार की पुत्रवधू एवं पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष पिंकी गुर्जर ने कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया।
भाजपा से पाला बदलने के महज 18 दिनों के भीतर तीन-तीन पार्षदों की जीत और फिर अध्यक्ष पद की कुर्सी तक दावेदारी का यह सफर क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय राजनीति के जानकार इसे केवल राजनीतिक निष्ठा बदलना नहीं, बल्कि एक अद्भूत संयोग और ‘राजयोग’ का प्रत्यक्ष उदाहरण मान रहे हैं।
