विद्युत निगम का बड़ा फरमान: भवानीमंडी के 23 हजार उपभोक्ताओं पर 11 करोड़ की ‘अतिरिक्त सुरक्षा राशि’ का भारी बोझ



31 जुलाई तक राशि जमा कराने का अल्टीमेटम; तुगलकी फरमान के खिलाफ कांग्रेस ने खोला मोर्चा, दी आंदोलन की चेतावनी

भवानीमंडी। ( जगदीश पोरवाल )

जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड सब-डिवीजन द्वारा भवानीमंडी क्षेत्र के लगभग 23,000 बिजली उपभोक्ताओं को अतिरिक्त सुरक्षा राशि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) जमा कराने के नोटिस थमाए गए हैं। विभाग ने उपभोक्ताओं को 31 जुलाई तक यह भारी-भरकम राशि जमा कराने का फरमान जारी किया है। इस आदेश से अकेले भवानीमंडी अंचल के उपभोक्ताओं पर करीब ₹11 करोड़ का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने का अनुमान है, जिससे आम जनता में गहरा असंतोष है।

बिजली निगम के कार्यालय पहुंचे कांग्रेस नेता, निरस्त करने की मांग

मंगलवार को ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रोड सिंह परमार एवं नगर कांग्रेस अध्यक्ष विनय ऑस्तोलिया के नेतृत्व में कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल स्थानीय विद्युत निगम कार्यालय पहुंचा और अधिकारियों से सीधी वार्ता कर कड़ा विरोध जताया।

कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि उपभोक्ताओं को थमाए जा रहे इन नोटिसों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। उन्होंने याद दिलाया कि 10-15 वर्ष पूर्व भी विभाग ने ऐसे नोटिस जारी किए थे, जिन्हें तत्कालीन सरकार ने जनहित में रद्द कर दिया था। कांग्रेस ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कार्यवाही नहीं की गई, तो पार्टी अंचल की जनता के लिए स्थानीय कार्यालय के बाहर उग्र धरना-प्रदर्शन करेगी। साथ ही नगर व ब्लॉक कांग्रेस ने आम निवासियों से भी इस अन्यायपूर्ण आदेश के खिलाफ आवाज बुलंद करने की अपील की है।

प्रतिनिधिमंडल में ये रहे मौजूद:
विरोध प्रदर्शन के दौरान पूर्व विधायक श्रीमती स्नेह लता आर्य, पूर्व नगर अध्यक्ष प्रमोद जैन ‘पिंटू’, नगर संगठन महामंत्री हकीम खान, महामंत्री प्रबल जैन एवं विधि प्रकोष्ठ के लोकेश गुप्ता (एडवोकेट) सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित थे।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना: “सरकार ने अपने ही पैरों पर मारी कुल्हाड़ी”

बिजली निगम द्वारा 31 जुलाई तक सुरक्षा राशि जमा कराने के इस फरमान को राजस्थान सरकार के लिए एक “राजनीतिक रूप से आत्मघाती कदम” माना जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, आम जनता पर अचानक 11 करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ डालकर सरकार ने सीधे तौर पर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है। आगामी पंचायत एवं नगर निकाय चुनावों के मुहाने पर खड़े राज्य में सत्ताधारी दल (भाजपा) को इस जनविरोधी फैसले का बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
जानकारों का मानना है कि जनाक्रोश को देखते हुए यदि राज्य सरकार आगामी चुनावों से पहले इस अतिरिक्त प्रतिभूति राशि की वसूली को तुरंत स्थगित या निरस्त कर देती है, तो यही कदम स्वयं सरकार के राजनीतिक हित में रहेगा।

क्या हैं सुरक्षा राशि से जुड़े मुख्य प्रावधान?

बिजली निगम के नियमों (धारा 8) के तहत सुरक्षा राशि की प्रक्रिया निम्न प्रकार है:

अस्थायी सुरक्षा राशि नया कनेक्शन लेते समय घरेलू, गैर-घरेलू व स्ट्रीट लाइट के लिए प्रति किलोवाट दर से राशि ली जाती है। कृषि श्रेणी के लिए दो माह के फिक्स्ड चार्ज के बराबर राशि तय है। यदि कनेक्शन किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर है, तो दोगुनी सुरक्षा राशि का नियम है।

अंतिम समीक्षा एवं वार्षिक आकलन

शुरुआती 12 महीनों की औसत खपत और प्रति वित्तीय वर्ष निगम सुरक्षा राशि की समीक्षा करता है। जमा राशि कम पाए जाने पर उपभोक्ता को 30 दिनों के भीतर अंतर राशि जमा कराने का नोटिस दिया जाता है।

समायोजन एवं वापसी: यदि उपभोक्ता की जमा राशि खपत के मुकाबले अधिक पाई जाती है, तो निगम उसे आगामी बिलों में समायोजित करता है या तय ब्याज के साथ वापस करता है।



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