श्री राधेश्याम मंदिर दुकान बिक्री मामला: डेढ़ माह बाद कृषि मंडी व्यापारी भी मैदान में, ट्रस्ट नियमों की ली जाएगी कानूनी जानकारी ।



भवानीमंडी
श्री राधेश्याम मंदिर की दुकान बिक्री का विवाद डेढ़ महीने के बाद एक नया मोड़ ले चुका है। अब तक इस मामले को लेकर ‘सर्वधर्म हिंदू समाज मंदिर रक्षा समिति’ ही मोर्चे पर थी, लेकिन अब कृषि उपज मंडी के व्यापारी भी इस विवाद में खुलकर सामने आ गए हैं। गौरतलब है कि राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट के नियमों के अनुसार, इसका अध्यक्ष और सदस्य कृषि उपज मंडी से जुड़ा व्यक्ति ही बन सकता है, जिसके चलते व्यापारियों का इस मामले में हस्तक्षेप बेहद अहम माना जा रहा है।

जल्दबाजी में हुई बैठक, वरिष्ठों की राय के बाद होगा अंतिम फैसला

ग्रैंड एंड स्वीट्स मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुदीप सालेचा ने बताया कि मंगलवार शाम 6.30 बजे कृषि उपज मंडी परिसर में व्यापारियों की एक विशेष बैठक बुलाई गई थी। हालांकि, बैठक काफी जल्दबाजी में रखने के कारण कई वरिष्ठ व्यापारी इसमें शामिल नहीं हो सके, जिसकी वजह से फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है।
सालेचा ने स्पष्ट किया कि व्यापारी वर्ग अब वरिष्ठ व्यापारियों से इस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी लेगा। इसके साथ ही मंदिर ट्रस्ट द्वारा बनाए गए बायलॉज (नियमों) का बारीकी से अध्ययन कर कानूनी सलाह ली जाएगी, जिसके आधार पर ही आगामी कदम उठाया जाएगा।

2008 के संविधान संशोधन पर विचार और ट्रस्टियों के इस्तीफे संगठन ने मंगवाये

इस मामले में कृषि उपज मंडी की भूमिका और अधिकारों को लेकर व्यापारियों ने मंथन शुरू कर दिया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप सालेचा के अनुसार, दुकान बिक्री का यह प्रकरण काफी लंबा खिंच चुका है। वर्ष 2008 में मंदिर के संविधान में कुछ संशोधन किए गए थे, व्यापारी वर्ग अब उस संशोधन को भी समझने का प्रयास कर रहा है।
इसके अलावा, दुकान बिक्री की नीलामी प्रक्रिया में वर्तमान अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर भी बैठक में विचार-विमर्श हुआ। इस बीच कृषि मंडी के चार व्यापारियों, जो ट्रस्ट के सदस्य भी थे, द्वारा दिए गए इस्तीफे की प्रति भी एसोसिएशन ने मंगवाई है ताकि मामले की तह तक जाया जा सके।

नियमों की अनदेखी को लेकर व्यापारियों में असंतोष

बैठक में मंडी के व्यापारियों ने मंदिर के मूल नियमों का हवाला देते हुए कहा कि राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट का सदस्य, पदाधिकारी या अध्यक्ष केवल वही व्यक्ति बन सकता है जो:
मंडी का अधिकृत व्यापारी (कच्चा या पक्का आढ़तिया) रहा हो।जिसने मंदिर के विकास और व्यवस्थाओं में अपना अंशदान दिया हो।
व्यापारियों का कहना था कि वर्तमान में चल रहे दुकान बिक्री के घटनाक्रम और ट्रस्ट की गतिविधियों में इन मूल और पारंपरिक नियमों की कथित तौर पर अनदेखी की जा रही है, इसी कानूनी और पारंपरिक नियम को ढाल बनाकर अब व्यापारी वर्ग एकजुट हो रहा है ताकि मंदिर की संपत्ति, परंपरा और व्यवस्थाओं को सुरक्षित रखा जा सके। आगामी बैठक में सभी व्यापारियों की सहमति से ठोस कदम उठाने पर निर्णय लिया जाएगा।

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