भवानीमंडी की राजुल बाई चेलावत का संथारे के साथ देवलोकगमन, 57 दिनों की तपस्या के बाद ली अंतिम सांस

भवानीमंडी/भैंसोदामंडी। ( जगदीश पोरवाल )

जैन धर्म की गौरवमयी परंपरा का निर्वहन करते हुए तिरुपति नगर निवासी परम आराधिका श्रीमती राजुल बाई जी चेलावत (उम्र लगभग 75 वर्ष) का सोमवार प्रातः 7:50 बजे समाधिपूर्वक देवलोकगमन हो गया। उन्होंने दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मबल का परिचय देते हुए 57 दिनों की दीर्घ तपस्या के साथ संलेखना संथारा व्रत पूर्ण किया और पंडित मरण को प्राप्त किया। वे स्वर्गीय श्रीमान सज्जन सिंह जी चेलावत (रामपुरा वाले) की धर्मपत्नी थीं।

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​पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, श्रीमती राजुल बाई जी ने ज्ञानगच्छाधिपति श्रुतधर पंडित रत्न परम पूज्य गुरुदेव श्री प्रकाशचंद्र जी म.सा. के आज्ञानुवर्तिनी साध्वी प्रमुखा पूज्या श्री गुरणी मैया अरविन्द कुंवर जी म.सा. की सुशिष्या पूज्या श्री राजेश कवंर जी म.सा. एवं पूज्या श्री मनीषा जी म.सा. के सानिध्य में गत 4 मई 2026 को सागारी संथारे के प्रत्याख्यान ग्रहण किए थे।

​इसके पश्चात, पूर्ण चेतना में रहते हुए उन्होंने समस्त सांसारिक आरंभ और परिग्रहों का त्याग कर दिया। 22 मई 2026 को उन्होंने पूज्या महासती जी से यावज्जीवन संलेखना संथारा अंगीकार किया। 57 दिनों की इस कठिन आत्म-साधना और तपस्या के बाद आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।

आज निकलेगी महाप्रयाण यात्रा

​श्रीमती राजुल बाई जी स्वर्गीय श्रीमती कंचनबाई-बसंतीलाल जी लोढ़ा की सुपुत्री, माणक जी व विमल जी चेलावत की भाभीसा, तथा रविन्द्र, नवीन, अजय व स्वर्गीय संजय चेलावत की काकीसा थीं। वे दिनेश जी छाजेड़ की सासुजी और शोभना जी छाजेड़ की माताजी थीं।

​प्रदीप बोहरा ने बताया कि दिवंगत भव्यात्मा की अंतिम महाप्रयाण यात्रा आज सोमवार (29 जून 2026) को प्रातः 11:30 बजे उनके निज निवास (तिरुपति नगर, ज्ञान विहार रोड, भैंसोदामंडी/भवानीमंडी) से नीलकंठ मुक्तिधाम के लिए प्रस्थान करेगी। उनके देवलोकगमन पर संपूर्ण जैन समाज और क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है ।

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