भवानीमंडी: श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया श्री गुरु अर्जन देव जी का शहीदी पर्व

भवानीमंडी, 18 जून।

सिक्खों के पांचवें गुरु, शांति और सहनशीलता के प्रतीक, साहिब श्री गुरु अर्जन देव जी महाराज का पावन शहीदी पर्व आज भवानी मंडी शहर में बड़ी श्रद्धा, भक्ति एवं सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर स्थानीय गुरुद्वारा साहिब में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संगत ने भाग लेकर गुरु साहिब के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।

​40 दिनों से चल रहे सुखमनी साहिब के पाठों की हुई समाप्ति

​पूर्व अध्यक्ष सरदार दर्शन सिंघ ने जानकारी देते हुए बताया कि शहीदी गुरु पर्व के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा साहिब में बीते 10 मई से लगातार श्री सुखमनी साहिब जी के लड़ीवार पाठ चल रहे थे। शहीदी पर्व के मुख्य दिन आज श्री सप्ताह पाठ साहिब जी की सम्पूर्ण समाप्ति (भोग) हुई।

​होनहार प्रतिभाओं का हुआ विशेष सम्मान

​धार्मिक आयोजन के साथ-साथ समाज की युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए एक विशेष सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। इसमें बोर्ड परीक्षाओं, विश्वविद्यालय परीक्षाओं सहित सामाजिक, आर्थिक एवं खेलकूद गतिविधियों में राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले विद्यार्थियों और युवाओं का सम्मान किया गया। राजस्थान टेक्सटाइल मिल्स से पधारे श्री रोहित अरोड़ा एवं गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष श्री प्रीतपाल सिंह ने प्रतिभावान युवाओं को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

​गुरु साहिब का बलिदान इतिहास में अद्वितीय: अमनदीप सिंह

​कार्यक्रम के दौरान गुरुद्वारा कमेटी के सचिव श्री अमनदीप सिंह ने संगत को संबोधित करते हुए गुरु अर्जन देव जी के जीवन, उनके आध्यात्मिक योगदान एवं अद्वितीय शहादत के इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:

​”गुरु साहिब ने मानवता, सत्य और धर्म की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया, जो आज भी समाज को सेवा, त्याग और सहनशीलता की प्रेरणा प्रदान करता है। उनका यह बलिदान इतिहास में अद्वितीय है और उनकी शिक्षाएं विश्व को प्रेम, सेवा और भाईचारे का संदेश देती हैं।”

​शब्द-कीर्तन से निहाल हुई संगत, बांटी गई ठंडी छबील

​शहीदी पर्व के अवसर पर गुरुद्वारा साहिब में विशेष दीवान सजाया गया। हजूरी रागी भाई सतनाम सिंह एवं भाई हरकीरत सिंह के जत्थे द्वारा गुरु अर्जन देव जी की शहादत को समर्पित वैराग्यमयी शब्द-कीर्तन, नाम-बाणी एवं कथा-कीर्तन प्रस्तुत कर संगत को निहाल किया गया। कार्यक्रम का समापन ‘सरबत के भले’ की अरदास के साथ हुआ। इसके बाद गुरु का अटूट लंगर बरताया गया।

​गर्म मौसम को देखते हुए गुरुद्वारा साहिब, नई सब्जी मंडी, स्टेशन चौराहा, और नेहरू पार्क सहित नगर के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर ठंडे-मीठे दूध की ‘छबील’ लगाई गई। इस सेवा कार्य में स्थानीय सिक्ख, सिंधी, पंजाबी तथा गुरु नानक नाम लेवा संगत ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी सेवाएं अर्पित कीं।

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