भवानीमंडी एसडीओ न्यायालय का ऐतिहासिक कीर्तिमान: अंतिम छोर तक पहुँच रहा त्वरित न्याय



राजस्व मामलों के निस्तारण में रिकॉर्ड उपलब्धि, 10 वर्ष से पुराने सभी प्रकरणों का हुआ समाधन

जगदीश पोरवाल (जनसंदेश )

भवानीमंडी। राजस्थान में राजस्व न्याय व्यवस्था को प्रभावी और जनोन्मुख बनाने की दिशा में भवानीमंडी उपखंड अधिकारी न्यायालय ने एक नया इतिहास रच दिया है। उपखंड अधिकारी सुश्री श्रद्धा गोमे के नेतृत्व में एसडीओ न्यायालय ने वर्ष 2025-26 में राजस्व मामलों के निस्तारण में अभूतपूर्व सफलता हासिल करते हुए लंबित प्रकरणों के समाधान का नया रिकॉर्ड स्थापित किया है।
न्यायालय द्वारा वर्ष 2025-26 में कुल 1,618 राजस्व मामलों का निस्तारण किया गया, जबकि चालू माह तक यह संख्या बढ़कर 1,892 तक पहुँच चुकी है। यह पिछले वर्षों के औसत वार्षिक निस्तारण (112 मामले) की तुलना में 1,344 प्रतिशत से अधिक वृद्धि को दर्शाता है।
सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि यह रही कि 10 वर्ष से अधिक पुराने सभी लंबित मामलों का शत-प्रतिशत निस्तारण कर दिया गया। वहीं, पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों की संख्या 112 से घटकर मात्र 19 रह गई है। राजस्व आवेदनों के निस्तारण की दर भी 18.5 प्रतिशत से बढ़कर 94.54 प्रतिशत तक पहुँच गई है।

दशकों पुराने विवादों का हुआ समाधान

एसडीओ न्यायालय ने कई महत्वपूर्ण और जटिल भूमि विवादों का समाधान कर जनहित को प्राथमिकता दी है।
करीब 60 वर्षों से विवादित मेला मैदान भूमि का मामला निपटाते हुए उसका स्वामित्व नगर पालिका को हस्तांतरित कराया गया, जिसके बाद भूमि को खेल स्टेडियम निर्माण के लिए आवंटित किया गया है।

इसके अतिरिक्त सेवा शिविरों के माध्यम से 1,068 बीघा से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। न्यायालय ने प्राचीन शिवालय मंदिर, राम मंदिर मांडवी, दुर्गा मंदिर तथा ठाकुरजी मंदिर पिपलिया जैसी धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों की भूमि को भी विवादों से मुक्त कर संरक्षण प्रदान किया।

बिना अतिरिक्त खर्च के बना मॉडल

यह उल्लेखनीय उपलब्धि बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय भार के केवल प्रशासनिक सुधारों और बेहतर कार्यप्रणाली से प्राप्त की गई है।
न्यायिक कार्यों के लिए सोमवार से बुधवार सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक का समय विशेष रूप से आरक्षित किया गया। साथ ही भूमि विवादों से जुड़ी रिपोर्टों को समयबद्ध रूप से प्राप्त करने, संबंधित पक्षों की उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा अनावश्यक तारीखों की परंपरा को हतोत्साहित करने जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया गया।

द्वार-द्वार न्याय’ की अनूठी पहल

ग्रामीण सेवा शिविरों के माध्यम से न्याय को सीधे जनता तक पहुँचाने की दिशा में भी न्यायालय ने उल्लेखनीय कार्य किया है। वर्ष 2025 के दौरान 27 ग्राम पंचायतों में आयोजित मोबाइल कोर्ट के माध्यम से राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम की धारा 136 के अंतर्गत 5,132 राजस्व आवेदनों का मौके पर ही निस्तारण एवं स्पष्टीकरण किया गया।
इस पहल से अनेक संभावित विवाद प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त हो गए और ग्रामीणों को न्यायालय के चक्कर लगाने से राहत मिली।

सामूहिक प्रयासों का परिणाम

इस उपलब्धि पर उपखंड अधिकारी एवं पीठासीन अधिकारी सुश्री श्रद्धा गोमे ने कहा कि यह सफलता किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि राज्य सरकार की प्रतिबद्धता, जिला कलक्टर के मार्गदर्शन, न्यायालय स्टाफ की मेहनत और आमजन के विश्वास का संयुक्त परिणाम है।
उन्होंने क्षेत्रवासियों से वर्तमान में चल रहे ग्रामीण एवं शहरी सेवा शिविरों में सक्रिय भागीदारी कर अपने राजस्व मामलों का समय पर समाधान कराने की अपील भी की।

त्वरित न्याय का सफल मॉडल

भवानीमंडी एसडीओ न्यायालय की यह उपलब्धि साबित करती है कि मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति, पारदर्शी कार्यप्रणाली और जनसंवेदनशील दृष्टिकोण के माध्यम से वर्षों पुराने राजस्व विवादों का प्रभावी समाधान संभव है। यह मॉडल राज्य सरकार के “अंतिम छोर पर बैठे नागरिक तक त्वरित न्याय” पहुँचाने के संकल्प को धरातल पर साकार करता दिखाई दे रहा है।



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