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जगदीश पोरवाल
व्यंग वाणी
दुनिया भर के रणनीतिकार और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भले ही इस बात पर माथापच्ची कर रहे हों कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव कब और कैसे खत्म होगा, लेकिन राजस्थान के आम आदमी की चिंता कुछ और ही है। प्रदेश की जनता आसमान से बरसते गोलों से नहीं, बल्कि नेताओं के मुंह से निकलने वाले ‘बयानों के मिसाइलों’ से हलकान है।
कार्टूनिस्ट अशोक द्वारा बनाए गए कार्टून में एक राजनीतिक कार्टून ने प्रदेश की इस कड़वी और मजेदार सच्चाई को सरेआम कर दिया है। जहाँ वैश्विक युद्धों के खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही है, वहीं राजस्थान का ‘सियासी थर्मामीटर’ सातवें आसमान को छूकर फटने को तैयार है।
उम्र भले ही ढलान पर, मगर जुबान पूरी ‘जवान’ है!
इस जुबानी जंग की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसमें कोई ‘नौसिखिया’ खिलाड़ी नहीं है। मैदान में उतरे हुए सूरमा राजनीति के मँझे हुए खिलाड़ी हैं। बालों की सफेदी और उम्र का उत्तरार्ध इनके जज्बे को कम नहीं कर पाया है।
हाईकमान की नजर में ‘बाहुबली’ बनने की होड़:
दोनों दलों के नेता दिल्ली दरबार (हाईकमान) की नजरों में खुद को ‘नंबर वन’ साबित करने के लिए इस कदर तत्पर हैं कि सुबह की चाय बाद में पीते हैं, विरोधी पर तीखा हमला पहले करते हैं।
दिल है कि मानता नहीं: इन बुजुर्ग नेताओं की बयानबाजी देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि भले ही घुटने थोड़ा कम साथ दे रहे हों, लेकिन इनकी जुबान आज भी 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है। इनके जज्बात आज भी उतने ही तरोताजा हैं जितने उनके युवा दिनों में हुआ करते थे।
अखबार के पन्नों पर छिड़ा ‘महाभारत’
कार्टून में दर्शाया गया कि अखबारों में आपको देश-दुनिया की खबरों से ज्यादा नेताओं के ‘पलटवार’ देखने को मिलेंगे। कार्टून के झरोखे से भी यही साफ झलक रहा है:
गहलोत बनाम शेखावत: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कोई बयान दागते हैं, तो केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का जवाबी मिसाइल तुरंत तैयार मिलता है।
तिवाड़ी का वार: उधर घनश्याम तिवाड़ी भी अपनी धारदार बयानबाजी से गहलोत कैंप पर तीखा प्रहार करने से नहीं चूक रहे।
जूली की एंट्री: इस खेल में टीकाराम जूली भी शेखावत पर हमला बोलकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
जनता की पुकार: इन चौतरफा हमलों के बीच फंसा प्रदेश का आम नागरिक अब बस आसमान की तरफ हाथ उठाकर यही कह रहा है— “हे भगवान! दुनिया के सारे युद्ध भले चलते रहें, बस हमारे प्रदेश की यह अंतहीन जुबानी जंग किसी तरह शांत करा दो!”
कार्टूनिस्ट अशोक ने यह बताने की कोशिश की है कि दुनिया के बड़े-बड़े विनाशकारी युद्ध और मिसाइलें भले ही शांत हो जाएं, लेकिन राजस्थान के राजनेताओं की ‘जुबान की मिसाइलें’ कभी शांत नहीं होने वालीं।

