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भवानीमंडी। (जगदीश पोरवाल)
आदमी कानूनी कागजात दुरुस्त करने में कितनी भी होशियारी या हेरा-फेरी कर ले, लेकिन सच की परतों के पीछे से कुछ गलतियां ऐसी निकल ही आती हैं जो पूरे खेल को बेनकाब कर देती हैं। भवानीमंडी के प्रसिद्ध श्री राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट द्वारा एक दुकान के बेचान (बिक्री) में भी कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है। एक के बाद एक बेहद चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं, जो इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
जिस अखबार को किसी ने देखा नहीं, उसमें छपा दी नीलामी की सूचना
सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंदिर ट्रस्ट ने दुकान नीलामी की सूचना एक कथित राज्य स्तरीय समाचार पत्र ‘दैनिक अधिकार’ में 15 अप्रैल 2026 को प्रकाशित करवाई थी। मजेदार बात यह है कि भवानीमंडी के 99 फीसदी लोगों ने इस अखबार का नाम आज तक न तो सुना है, न पढ़ा है और न ही यह अखबार कभी भवानीमंडी में बिकते हुए देखा गया।
स्थानीय निवासियों का सीधा आरोप है कि जानबूझकर ऐसे ‘गुमनाम’ अखबार में विज्ञापन दिया गया ताकि क्षेत्र के बड़े व्यवसायियों और आम जनता को इस नीलामी का पता ही न चल सके और पर्दे के पीछे पसंदीदा व्यक्ति को लाभ पहुंचाया जा सके।
दावे-आपत्ति के विज्ञापन में भी अधूरी जानकारी का खेल
होशियारी का खेल यहीं खत्म नहीं हुआ। ट्रस्ट द्वारा 2 मई को भवानीमंडी से प्रकाशित एक साप्ताहिक अखबार में दुकान बिक्री को लेकर दावे-आपत्ति आमंत्रित करने का विज्ञापन दिया गया। चूंकि अखबार साप्ताहिक था (जिसका प्रकाशन 30 अप्रैल से 6 मई तक की अवधि का था), इसलिए यह विज्ञापन भी लोगों के संज्ञान में नहीं आ सका।
इसके अलावा, विज्ञापन में भारी लापरवाही या कहें कि जानबूझकर ‘गोपनीयता’ बरती गई:
नीलाम होने वाली दुकान का साइज (आकार) नहीं लिखा गया।
विज्ञापन में किस दिनांक को दुकान की नीलामी होगी, इसका भी कोई उल्लेख नहीं किया गया। इस तरह आधी-अधूरी सूचना देकर आम आदमी को गुमराह करने का प्रयास किया गया।
‘भविष्यवक्ता’ निकला ट्रस्ट! नीलामी 18 को, नक्शा 10 को ही तैयार
विवाद की सबसे बड़ी जड़ यह है कि इस दुकान को आनन-फानन में 65 लाख रुपए में बेच दिया गया। इस पूरी फिक्सिंग का सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाला पहलू यह सामने आया है कि दुकान की आधिकारिक नीलामी 18 तारीख को हुई, लेकिन उस दुकान का नक्शा 10 तारीख को ही तैयार कर लिया गया था। यह तथ्य साफ इशारा करता है कि खरीददार और कीमतें पहले से तय थीं, नीलामी तो महज एक कागजी औपचारिकता थी।
अधिकारियों को पत्र भेजने का दावा भी निकला झूठा
देवस्थान विभाग को भेजी गई पत्रावली में ट्रस्ट ने शहर के लिए इस गुमनाम अखबार की कटिंग लगाई और दावा किया कि उन्होंने पचपहाड़ तहसीलदार और भवानीमंडी नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी (EO) को 1 मई 2026 को पत्र भेजकर सूचित कर दिया था, ताकि कागजी कोरम पूरा रहे।
हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी सरकारी व धार्मिक संपत्ति की नीलामी की सूचना उपखंड अधिकारी (SDO) भवानीमंडी या जिला कलेक्टर को नहीं दी गई, जहां के सार्वजनिक नोटिस बोर्ड पर इसे चस्पा किया जा सकता था। लेकिन जब जमीनी हकीकत जानी गई, तो अधिकारियों के बयानों ने ट्रस्ट के दावों की धज्जियां उड़ा दीं:
“मंदिर ट्रस्ट द्वारा दुकान नीलामी के संदर्भ में हमारे पास आज दिनांक तक भी कोई पत्र नहीं आया है। यदि पत्र प्राप्त होता तो हम हमारा प्रतिनिधि नीलामी की प्रक्रिया में भेजते।”
— अब्दुल हफीज, तहसीलदार, पचपहाड़ (भवानीमंडी)
“राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट द्वारा दुकान नीलामी के संदर्भ में हमारे पास कोई भी पत्र नहीं आया है। यदि पत्र प्राप्त होता तो हम उसको हमारे नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर देते।”
— मनीष मीणा, अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका भवानीमंडी
जनता में भारी आक्रोश, अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग तेज
कागजों को ‘कंप्लीट’ मानकर बैठी मंदिर ट्रस्ट की यह ‘होशियारी’ अब खुद उनके गले की फांस बनती जा रही है। जैसे ही नगर के ठाकुर जी के भक्तों के संज्ञान में आया कि मंदिर की संपत्ति को गुपचुप तरीके से बेच दिया गया है, जनता का गुस्सा फूट पड़ा।
सार्वजनिक बैठक कर ‘सर्व धर्म हिंदू मंदिर रक्षा समिति’ का गठन किया गया। समिति द्वारा बीते 26 मई को नगर में एक विशाल वाहन रैली (जन आक्रोश रैली) निकालकर उपखंड अधिकारी श्रद्धा गोमे को ज्ञापन सौंपा गया था। समिति की मुख्य मांगें हैं:
मामले की उच्च स्तरीय जांच कर इस पूरी ‘फिक्सिंग’ और रजिस्ट्री को तुरंत निरस्त किया जाए।
बेची गई दुकान को वापस मंदिर के नाम दर्ज किया जाए।
मंदिर ट्रस्ट के वर्तमान अध्यक्ष तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।
असर का इंतजार:
वाहन रैली और जन आक्रोश के 20 दिन बीत जाने के बाद भी मंदिर के ट्रस्टियों द्वारा इन मांगों पर अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया है, जिससे स्थानीय नागरिकों और भक्तों में नाराजगी और ज्यादा गहराती जा रही है। प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि यह आस्था और मंदिर की संपत्ति के साथ सरासर खिलवाड़ है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

