मानवता की मिसाल: दुख की घड़ी में भी गुप्ता परिवार ने लिया नेत्रदान का फैसला, दो नेत्रहीनों को मिलेगी नई जिंदगी

भवानीमंडी।

दुख की अत्यंत विकट घड़ी में भी दूसरों के जीवन में उजाला भरने का एक अत्यंत प्रेरणादायक उदाहरण भवानीमंडी नगर में सामने आया है। क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों को सीमित खर्चों में तीर्थ यात्रा करवाने वाले बद्रीलाल गुप्ता का शनिवार को एक सड़क दुर्घटना में असामयिक निधन हो गया। इस गहरे शोक और अप्रत्याशित हादसे से स्तब्ध होने के बावजूद उनके परिवार ने मानवता का परिचय देते हुए ऐतिहासिक व साहसिक निर्णय लिया और उनका नेत्रदान करवाया। यह भवानीमंडी नगर का 158वां नेत्रदान है।

रास्ते में हुआ हादसा

भारत विकास परिषद एवं शाइन इंडिया फाउंडेशन के नेत्रदान संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल ने बताया कि मेड़तवाल समाज के अध्यक्ष राधेश्याम गुप्ता के भतीजे बद्रीलाल गुप्ता मोटरसाइकिल से झालरापाटन जा रहे थे। रास्ते में किसी अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। गंभीर स्थिति में उन्हें झालावाड़ मेडिकल कॉलेज ले जाया जा रहा था, परंतु उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

शोक के बीच बेटों का परोपकारी निर्णय

इस अचानक हुए हादसे से पूरा परिवार स्तब्ध रह गया। इसके बावजूद मृतक बद्रीलाल गुप्ता के पुत्रों— श्रीनाथ, केदार एवं नंदकिशोर ने हिम्मत दिखाई और पिता की आंखों से दुनिया को रोशन करने का परोपकारी निर्णय लिया। पार्षद राजकुमार गुप्ता की सूचना पर कोटा से शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम ‘ज्योति-रथ’ के साथ भवानीमंडी पहुंची और उपस्थित परिजनों के सामने नेत्रदान की प्रक्रिया को सम्मानपूर्वक पूरा कर कॉर्निया प्राप्त किया।

सहयोगी रहे अग्रगामी

नेत्रदान की इस पूरी प्रक्रिया में लक्ष्मीनारायण, अजय, रामकिशन, पुरुषोत्तम, कैलाश, जयप्रकाश गुप्ता एवं डॉ. मयंक जैन आदि ने सक्रिय सहयोग किया। ईबीएसआर के बीबीजे चैप्टर कोऑर्डिनेटर डॉ. कुलवंत गौड़ ने बताया कि:

​”नेत्रदानी बद्रीलाल गुप्ता का कॉर्निया काफी अच्छी स्थिति में पाया गया है। इसे तुरंत आई बैंक जयपुर भिजवा दिया गया है, जहां इससे दो नेत्रहीनों के जीवन में फिर से उजाला आ सकेगा।”

क्षेत्र में शोक की लहर

मेड़तवाल समाज के उपाध्यक्ष गोविंद गुप्ता ने बताया कि बद्रीलाल गुप्ता एक तीर्थ यात्रा कंपनी का संचालन करते थे। वे न्यूनतम खर्चों पर नगर, समाज और क्षेत्र के हजारों लोगों को देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों की यात्रा करवाते थे। उनके सादगीपूर्ण और सेवाभावी स्वभाव के कारण क्षेत्र में उनकी गहरी पैठ थी। जैसे ही उनके निधन और इस महान दान का समाचार क्षेत्र में प्रसारित हुआ, हजारों धर्मावलम्बियों और नगरवासियों ने गहरा शोक प्रकट करते हुए परिवार के इस साहसिक कदम की सराहना की।

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