मुस्कुराइए! आप सरकारी इलाज में हैं’ – RGHS की नई ‘सेल्फी नीति’ से भ्रष्टाचार पर ‘तस्वीर’ प्रहार



जगदीश पोरवाल

यदि आप रा
जस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के लाभार्थी हैं और आने वाले दिनों में अस्पताल में भर्ती होने की सोच रहे हैं, तो बीमारी के साथ-साथ थोड़ा सा ‘फेशियल एक्सप्रेशन’ भी ठीक कर लीजिएगा। सरकार ने भ्रष्टाचार मिटाने और फर्जी बिलिंग पर रोक लगाने के लिए एक ऐतिहासिक, क्रांतिकारी और बेहद ‘मल्टीमीडिया’ फैसला लिया है। अब अस्पतालों में सिर्फ डॉक्टर की डिग्री और मरीज की बीमारी नहीं, बल्कि दोनों की ‘केमिस्ट्री’ देखी जाएगी—वो भी लाइव तस्वीरों के जरिए!

नई मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार, अस्पताल में भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज होने तक और तो और, ऑपरेशन टेबल पर लेटे-लेटे भी मरीज को डॉक्टर साहब के साथ ‘पाउट’ या कम से कम एक गंभीर ‘सयुंक्त फोटो’ खिंचवानी होगी।

‘ऑपरेशन से पहले भी, ऑपरेशन के दौरान भी!’

कार्टूनिस्ट अशोक के तीखे व्यंग्य को देखें तो साफ है कि सरकार अब ‘नो फोटो, नो इलाज’ की नीति पर चल पड़ी है। नई गाइडलाइन के मुताबिक, सर्जरी वाले मामलों में दो फोटो जरूरी होंगी—एक ऑपरेशन थियेटर में कैंची चलने से पहले और दूसरी ऑपरेशन की लाइव प्रक्रिया के दौरान।
कार्टून में एक आम मरीज सिर पकड़कर सोच रहा है कि वह अपनी जान बचाए, दर्द से कराह रहे चेहरे को संभाले या डॉक्टर साहब के साथ कैमरा एंगल सेट करे! वहीं सरकारी अस्पताल की दीवार पर लगे ‘फोटो पॉइंट’ का बोर्ड और उस पर लिखा संदेश “भ्रष्टाचार मुक्त स्वास्थ्य योजना, ईमानदार मरीजों को हुई असुविधा के लिए खेद है” व्यवस्था के इस नए ड्रामे पर करारा तंज कसता है। यानी अगर आप ईमानदार मरीज हैं, तो दर्द में भी मुस्कुराकर फोटो खिंचवाने की ‘असुविधा’ झेलने के लिए तैयार रहिए।

व्यंग्य की कसौटी पर:

डॉक्टर-मरीज का नया रिश्ता: अब तक डॉक्टर मरीज की नब्ज पकड़ते थे, अब उन्हें फ्रेम में आकर मरीज के साथ सही लाइटिंग और पोजिशनिंग भी देखनी होगी।
अनावश्यक दवाइयों और जांच पर रोक: सरकार ने डॉक्टरों को केवल जरूरी दवाएं लिखने का निर्देश दिया है। अब देखना यह है कि दवाइयों के पर्चे छोटे होते हैं या फोटो खींचने के चक्कर में क्लेम की फाइलें और बड़ी हो जाती हैं।

समय पर क्लेम वरना 50% का फटका
अस्पतालों को भी चेतावनी दी गई है कि डिस्चार्ज के 72 घंटे के भीतर क्लेम फाइल करें, नहीं तो 15 दिन की देरी पर सीधा आधा (50%) भुगतान काट लिया जाएगा।

सरकार की मंशा फर्जी अस्पतालों और बोगस बिलिंग पर लगाम लगाना

कुल मिलाकर, सरकार की मंशा फर्जी अस्पतालों और बोगस बिलिंग पर लगाम लगाने की है, जो सराहनीय है। लेकिन कार्टूनिस्ट अशोक ने जिस बखूबी से एक लाचार मरीज के चेहरे की हवाइयां उड़ती दिखाई हैं, वह यह बताने के लिए काफी है कि कागजी और डिजिटल औपचारिकताओं का यह बोझ अंततः उस बीमार व्यक्ति को ही उठाना पड़ता है, जो अस्पताल फोटो खिंचवाने नहीं, बल्कि अपनी जान बचाने आता है।
अब देखना यह है कि इस ‘फोटोशूट योजना’ के बाद राज्य के स्वास्थ्य का ग्राफ कितना सुधरता है और अस्पतालों में कितने ‘फोटोग्राफर सह वार्ड बॉय’ की नई भर्तियां निकलती हैं!

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