भवानीमंडी (झालावाड़)। ( जगदीश पोरवाल )स्थानीय राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट की मूल्यवान व्यावसायिक दुकान की नीलामी प्रक्रिया में एक बहुत बड़े और सुनियोजित घोटाला होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सर्व हिंदू समाज मंदिर रक्षा समिति भवानीमंडी द्वारा देवस्थान विभाग के आयुक्त (उदयपुर) को एक विस्तृत शिकायत पत्र भेजकर इस पूरी हेराफेरी की उच्च स्तरीय जांच कराने और वर्तमान अवैध नीलामी प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करने की पुरजोर मांग की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उप-पंजीयक कार्यालय से प्राप्त प्रमाणित दस्तावेजों के अलावा बैंक लेन-देन के विश्लेषण करना अति आवश्यक है ।जानकारी के अनुसार नीलामी में सरकारी नियमों और देवस्थान विभाग के आदेशों को पूरी तरह ताक पर रखकर वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दिया गया है। जो जांच का विषय है ।
विज्ञापन दबाने का गंभीर षड्यंत्र और विभागीय नियमों की अवहेलना
शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग (कोटा खंड) के आदेश (क्रमांक एफ/न्याय/देव/1326 दिनांक 11.06.2025) के तहत इस बहुमूल्य संपत्ति की नीलामी के लिए कड़े नियम व शर्तें तय की गई थीं। नियमानुसार, इस सार्वजनिक नीलामी का विज्ञापन राज्य स्तरीय और स्थानीय समाचार पत्रों में व्यापक प्रसार-प्रसार के लिए प्रकाशित किया जाना अनिवार्य था। साथ ही इसकी प्रतियां कलेक्ट्रेट झालावाड़, उपखंड अधिकारी भवानीमंडी, तहसीलदार और नगर निकाय के नोटिस बोर्ड पर चस्पा की जानी थीं।
परंतु, ट्रस्ट द्वारा इन शर्तों का उल्लंघन करते हुए एक गंभीर षड्यंत्र रचा गया। केवल कानूनी खानापूर्ति के लिए एक समाचार पत्र में विज्ञापन तो लगवाया गया, लेकिन उसकी प्रतियां (अखबारों की प्रतियां) बाजार और जनता के बीच बंटने ही नहीं दी गईं। इस विज्ञापन को सार्वजनिक होने से रोकने के लिए संबंधित मीडिया को कथित तौर पर एक मोटी धनराशि का संदिग्ध भुगतान किया गया और आम जनता को सूचना से वंचित रखकर बंद कमरे में कागजी कोरम पूरा कर लिया गया।
देवस्थान विभाग कोटा द्वारा 29 मई को राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट को पत्र लिखकर दुकान नीलामी की प्रक्रिया की पूरी जानकारी मांगी गई थी ।
नीलामी से पहले ही रजिस्ट्री और तारीखों की खुली धोखाधड़ी
दस्तावेजों की जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। रिकॉर्ड के अनुसार, नीलामी की तारीख 18 मई 2026 तय की गई थी, जबकि रजिस्ट्री के साथ संलग्न आधिकारिक साइट प्लान (नक्शा) ड्राफ्ट्समैन द्वारा 10 मई 2026 को ही तैयार कर दिया गया था। इस नक्शे पर विजेता (ट्रस्ट अध्यक्ष कृष्ण कुमार राठी) और क्रेता (मुकेश शर्मा) के हस्ताक्षर नीलामी से 8 दिन पहले यानी 10 मई को ही हो चुके थे। यह इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि नीलामी महज एक दिखावा थी और क्रेता तथा विजेता का चयन पहले ही फिक्स किया जा चुका था।
इस तारीख की हेरा फेरी को लेकर देवस्थान विभाग कोटा द्वारा एक पत्र नगरपालिका भवानीमंडी को 26 मई को लिखा गया था ।
धरोहर राशि गायब करने और खातों का खेल
समिति द्वारा दिए गए ज्ञापन में बताया गया कि नियमों के मुताबिक, किसी भी धार्मिक या सार्वजनिक संपत्ति की नीलामी में भाग लेने वाले सभी बोली दाताओं को धरोहर राशि ट्रस्ट के बैंक खाते में अनिवार्य रूप से जमा करानी होती है। लेकिन इस कथित नीलामी में किसी भी बोलीदाता से कोई धरोहर राशि नहीं ली गई। बोलीदाताओं की आपस में अवैध पार्टनरशिप थी और वे वास्तव में प्रतिस्पर्धा का हिस्सा नहीं थे, बल्कि वे मुख्य क्रेता के पार्टनर थे।
ज्ञापन में बताया गया है कि एकत्र की गई जानकारी में में यह भी सामने आया कि बोलीदाताओं ने 18 मई और 19 मई 2026 को क्रेता मुकेश शर्मा की फर्म के बैंक खाते से पैसे प्राप्त किए थे। यदि यह राशि बोलीदाताओं की अपनी थी, तो यह नीलामी से पहले और बाद में क्रेता के खातों में क्यों और किस आधार पर ट्रांसफर हो रही थी?
मूल वीडियोग्राफी और रिकॉर्ड गायब, फॉरेंसिक ऑडिट की मांग
समिति ने आरोप लगाया है कि कोटा से आई विशेष निरीक्षण टीम को गुमराह करने के लिए मूल वीडियोग्राफी रिकॉर्ड (जो कि 10 मई की बैक-डेट फिक्सिंग को उजागर कर सकता था) को छुपा दिया गया है या उसमें बदलाव किया जा सकता है। इसलिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए:
मुकेश शर्मा की फर्म, गोविंद टिंबर मर्चेंट तथा सभी फर्जी बोलीदाताओं के बैंक खातों का 18.05.2026 से 19.05.2026 के बीच का लेन देन की फॉरेंसिक ऑडिट करने की मांग की गई।
देवस्थान कार्यालय की मिलीभगत की जांच हो, क्योंकि सहायक आयुक्त कार्यालय द्वारा 24.08.2025 को एक आधिकारिक पत्र जारी होने के बाद भी ट्रस्ट द्वारा उसे नजरअंदाज कर दिया गया जिसकी आज तक कोई ठोस विभागीय कार्रवाई नहीं की गई।
दिनांक 18 मई की मूल वीडियोग्राफी को जब्त कर स्वतंत्र फॉरेंसिक लैब से इसकी जांच कराई जाए।
जन-आक्रोश और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
इस मामले को लेकर स्थानीय जनता और श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश है। यदि देवस्थान विभाग ने इस सुनियोजित भ्रष्टाचार पर तुरंत कड़ा संज्ञान नहीं लिया और नीलामी को निरस्त नहीं किया, तो सर्व हिंदू समाज मंदिर रक्षा समिति भवानीमंडी इस मामले को लेकर न्यायालय में जनहित याचिका दायर करेगी और दोषियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) व सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत आपराधिक मुकदमे दर्ज करवाएगी।
ज्ञापन की प्रतियां मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार, देवस्थान मंत्री, क्षेत्रीय सांसद व विधायक, तथा जिला कलेक्टर झालावाड़ को भी आवश्यक एवं त्वरित कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई हैं।

