भवानीमंडी पुलिस की बड़ी सफलता: अंधे कत्ल का पर्दाफाश, निर्माम हत्या का आरोपी रामसिंह गिरफ्तार

भवानीमंडी (झालावाड़)।

भवानीमंडी थाना पुलिस ने करीब तीन सप्ताह पहले हुए एक अंधे कत्ल (ब्लाइंड मर्डर) का सनसनीखेज खुलासा करने में सफलता हासिल की है। पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और मनोवैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करते हुए मृतक जगदीश लुहार की निर्मम हत्या करने वाले मुख्य आरोपी रामसिंह को गिरफ्तार कर लिया है।

​क्या था पूरा मामला?

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, गत 14 मई 2026 को भवानीमंडी इलाका अंतर्गत गरोठ फाटक पचपहाड़ के पास जगदीश (पुत्र श्री कन्हैयालाल, जाति लुहार निवासी पचपहाड़) का शव संदिग्ध अवस्था में मिला था। मृतक के शरीर से काफी खून बहा हुआ था। इस संबंध में मृतक के भतीजे राहुल पांचाल ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद मर्ग संख्या 16/2026 धारा 194 बीएनएसएस 2023 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।

​पुलिस की त्वरित कार्रवाई और वैज्ञानिक अनुसंधान

​घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस अधीक्षक (SP) श्री अमित कुमार (I.P.S.) के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री भागचन्द मीणा और वृत्ताधिकारी (R.P.S.) श्री कमल मीणा के सुपरविजन में भवानीमंडी थानाधिकारी प्रमोद कुमार के नेतृत्व में टीम ने काम शुरू किया।

​एफएसएल (FSL) टीम द्वारा घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए गए। पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण, आसूचना संकलन और मनोवैज्ञानिक तरीकों का सहारा लेते हुए कड़ियां जोड़ीं। इसके बाद मामला दर्ज कर हत्या के आरोपी रामसिंह (पुत्र गोपालसिंह जाति सौंधिया राजपूत, निवासी गुराडिया माना, थाना भवानीमंडी) को धर-दबोचा।

​आरोपी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड

​पुलिस गिरफ्त में आया आरोपी रामसिंह एक शातिर अपराधी है। उसके खिलाफ भवानीमंडी थाने में पहले से ही कई गंभीर मामले दर्ज हैं:

  • वर्ष 2015: प्रकरण संख्या 29/2015 (धारा 143, 341, 323, 325 भादस)
  • वर्ष 2017: प्रकरण संख्या 13/2017 (धारा 341, 323, 504 भादस)
  • वर्ष 2020: प्रकरण संख्या 499/2020 (धारा 435, 504 भादस)

​खुलासे में इस टीम की रही विशेष भूमिका

​इस अंधे कत्ल को सुलझाने वाली टीम में थानाधिकारी प्रमोद कुमार, अतिरिक्त निदेशक (एफएसएल कोटा) राखी खन्ना, वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रभारी (फोरेंसिक टीम झालावाड़) शंभू दयाल मालव सहित कई पुलिसकर्मी शामिल थे। विशेष रूप से तकनीकी विश्लेषण और आसूचना संकलन में कांस्टेबल तेजेन्द्र सिंह (कांस्टेबल 1379), विकास (कांस्टेबल 285) और महेश (कांस्टेबल 1380) की अहम और सराहनीय भूमिका रही।

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