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पालघर जिले के अंबेसारी गांव में तैयार हुई 417 मीटर लंबी सुरंग; उन्नत सुरक्षा प्रणालियों का हुआ इस्तेमाल
( जगदीश पोरवाल )
कोटा
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, देश की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना ने एक और बड़ी इंजीनियरिंग सफलता हासिल की है। महाराष्ट्र के पालघर जिले के दहानू तालुका स्थित अंबेसारी गांव में तीसरी पर्वतीय सुरंग (एमटी-07) का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
गौर करने वाली बात यह है कि पालघर जिले में महज पांच महीनों के भीतर तीन पर्वतीय सुरंगों का निर्माण पूरा किया जा चुका है, जो इस तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण खंड में तेज प्रगति को दर्शाता है।
सुरंग की खासियतें और अत्याधुनिक तकनीक
लंबाई और चौड़ाई: दोनों ओर की पटरियों के लिए बनाई गई यह एमटी-07 सुरंग 417 मीटर लंबी और 14.4 मीटर चौड़ी है।
निर्माण विधि: सुरंग की खुदाई दोनों सिरों से नियंत्रित ड्रिलिंग और विस्फोट विधि द्वारा की गई है।
अत्याधुनिक निगरानी: संरचनात्मक स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वास्तविक समय (रियल-टाइम) की निगरानी व्यवस्था की गई। इसमें सरफेस सेटलमेंट पॉइंट्स (एसएसपी), 3डी टारगेट, स्ट्रेन गेज और सिस्मोग्राफ जैसे भू-तकनीकी उपकरणों से कंपन और सुरंग की गतिविधि पर निरंतर नजर रखी गई।
श्रमिक सुरक्षा: काम के दौरान वेंटिलेशन सिस्टम, अग्नि सुरक्षा और नियंत्रित पहुंच सहित व्यापक सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया गया।
महाराष्ट्र खंड में सुरंग निर्माण की स्थिति
बुलेट ट्रेन परियोजना के कुल मार्ग में आने वाली 8 पर्वतीय सुरंगों में से 7 महाराष्ट्र के पालघर जिले में हैं और 1 गुजरात के वलसाड जिले में है (जिसका काम पहले ही पूरा हो चुका है)। महाराष्ट्र की स्थिति इस प्रकार है:
पर्वतीय सुरंगों की वर्तमान स्थिति:
एमटी-05 (पालघर, सफाले): यह 1.5 किलोमीटर लंबी सुरंग है। इसका निर्माण 02 जनवरी 2026 को पूरा हुआ। यह महाराष्ट्र खंड की पहली सफल सुरंग है।
एमटी-06 (पालघर): इस 454 मीटर लंबी सुरंग का काम 03 फरवरी 2026 को पूरा किया गया। इसमें अत्याधुनिक न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) तकनीक का इस्तेमाल हुआ।
एमटी-07 (अंबेसारी, पालघर): यह 417 मीटर लंबी सुरंग हाल ही में 02 जून 2026 को बनकर तैयार हुई है। इसे नियंत्रित ड्रिलिंग और विस्फोट विधि से बनाया गया है।
एमटी-08 (पालघर): 350 मीटर लंबी इस सुरंग का काम 05 अक्टूबर 2023 को ही पूरा कर लिया गया था, जो वापी-बोइसर खंड के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
एमटी-03 और एमटी-04 (पालघर): ये दोनों सुरंगें अभी निर्माणाधीन हैं। एमटी-03 का 80% से अधिक और एमटी-04 का लगभग 60% काम पूरा हो चुका है।
एमटी-01 और एमटी-02 (पालघर): इन दोनों सुरंगों में खुदाई और निर्माण का कार्य लगातार तेजी से जारी है।
वलसाड सुरंग (गुजरात): गुजरात खंड में आने वाली इस एकमात्र पर्वतीय सुरंग का निर्माण कार्य पहले ही पूरी तरह संपन्न हो चुका है।
औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगा गति
वापी (गुजरात) और बोइसर (महाराष्ट्र) के बीच के महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र में आने वाली तीनों पर्वतीय सुरंगों (एमटी-08, एमटी-07 और एमटी-06) की खुदाई का काम अब पूरी तरह संपन्न हो चुका है। इस कॉरिडोर में उन्नत सुरंग और निर्माण प्रौद्योगिकियों के उपयोग से देश के हाई-स्पीड रेल बुनियादी ढांचे को एक नया और सुरक्षित भविष्य मिल रहा है।


