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कोटा। पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल ने माल परिवहन को अधिक तेज, दक्ष और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में ‘क्रैक ट्रेन’ परिचालन के जरिए एक बड़ी सफलता हासिल की है। मंडल में एक महीने के भीतर रिकॉर्ड 973 क्रैक ट्रेनों का सफल संचालन किया गया, जिससे रेलवे को 973 क्रू सेट की भारी बचत हुई है। इस व्यवस्था से मालगाड़ियों की रफ्तार बढ़ने के साथ ही व्यापारिक जगत और उद्योगों के लिए माल ढुलाई का रास्ता आसान हुआ है।
प्रतिदिन औसतन 33 ट्रेनों का संचालन
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक व जनसंपर्क अधिकारी श्री सौरभ जैन ने बताया कि कोटा मंडल में प्रतिदिन औसतन 33 क्रैक ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इस दौरान इन मालगाड़ियों की औसत गति 42.29 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। क्रैक ट्रेन प्रणाली का मुख्य उद्देश्य मालगाड़ियों को अनावश्यक ठहराव (स्टॉपेज) और परिचालन बाधाओं से मुक्त रखकर उनके निर्धारित गंतव्य तक समय पर पहुंचाना है। इससे न केवल रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ी है, बल्कि समय और संसाधनों की भी बड़ी बचत हो रही है।
विभिन्न खंडों पर ऐसे हुआ परिचालन
मंडल द्वारा अलग-अलग रूटों पर योजनाबद्ध तरीके से क्रैक ट्रेनें चलाई गईं:
- सागर–कोटा खंड: 289 ट्रेनें
- नागदा–सागर खंड: 248 ट्रेनें
- रतलाम–गंगापुर सिटी–रतलाम खंड: 245 ट्रेनें
- गंगापुर सिटी–चित्तौड़गढ़–गंगापुर सिटी खंड: 108 ट्रेनें
- कोटा–बयाना–कोटा खंड: 68 ट्रेनें
- सवाई माधोपुर–रुठियाई–सवाई माधोपुर खंड: 15 ट्रेनें
व्यापार और किसानों को सीधा लाभ
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, मालगाड़ियों की गति बढ़ने का सीधा फायदा स्थानीय उद्योगों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और किसानों को मिल रहा है। इससे कच्चा माल और तैयार उत्पाद बिना किसी देरी के समय पर मंडियों और फैक्ट्रियों तक पहुंच रहे हैं। इस नवाचार से भारतीय रेलवे की साख और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता दोनों मजबूत हुई हैं।

