शाइन इंडिया फाउंडेशन की पहल: सालों बाद विवेक की आंखों में लौटी रोशनी, देख पाया माता-पिता का चेहरा

अत्याधुनिक ‘डीमैक’ तकनीक से हुआ कॉर्निया ट्रांसप्लांट; साधनहीन परिवार के तीनों बच्चों के इलाज का खर्च संस्था ने उठाया

भवानीमंडी (जगदीश पोरवाल)।

हाड़ौती संभाग में पिछले 15 वर्षों से नेत्रदान, अंगदान और देहदान के क्षेत्र में सक्रिय एकमात्र संस्था ‘शाइन इंडिया फाउंडेशन’ ने एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश की है। संस्था के प्रयासों से कॉर्निया की अंधता से पीड़ित 13 वर्षीय बालक विवेक को नया जीवन और रोशनी मिली है। सालों बाद ठीक से अपने माता-पिता और भाई-बहनों को देख पाकर विवेक की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

जागरूकता कार्यशाला में सामने आया था मामला

​शाइन इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. कुलवंत गौड़ ने बताया कि चार माह पूर्व एक नेत्रदान जागरूकता कार्यशाला के दौरान बारां जिले की किशनगंज तहसील के ग्राम विलासगढ़ निवासी रामराज का परिवार संस्था के संपर्क में आया था। रामराज के तीन बच्चे—विवेक, प्रियंका और शुभम—जन्म के कुछ समय बाद से ही पूरी तरह देख नहीं पा रहे थे।

​जब संस्था ने तीनों बच्चों को कोटा के प्रसिद्ध नेत्ररोग चिकित्सक डॉ. अरनव सरोया को दिखाया, तो सामने आया कि तीनों बच्चे आंखों की पुतली (कॉर्निया) सफेद हो जाने की गंभीर बीमारी ‘कंजेटियल हेरेडिटरी एंडोथीलियल डिस्ट्रॉफी’ से पीड़ित हैं। इसका एकमात्र इलाज कॉर्नियल प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) ही था।

संस्था ने उठाया इलाज और यात्रा का पूरा खर्च

​परिवार बेहद साधनहीन होने के कारण इलाज कराने में असमर्थ था। ऐसे में शाइन इंडिया फाउंडेशन ने जिम्मेदारी उठाते हुए तीनों बच्चों को अपने व्यक्तिगत खर्चे पर इंदौर के शंकरा नेत्रालय भेजा। कोटा से इंदौर आने-जाने का यात्रा व्यय, दवाइयां, ऑपरेशन और जांच का पूरा खर्च संस्था द्वारा स्वयं वहन किया गया।

अत्याधुनिक ‘डीमैक’ तकनीक से हुई जटिल सर्जरी

​ज्योति मित्र कमलेश गुप्ता दलाल ने बताया कि इंदौर के शंकरा नेत्रालय में कॉर्नियल ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. अमित देवकर ने बच्चों की जांच की। स्थिति जटिल होने के बावजूद उन्होंने रोशनी आने की संभावना जताई।

​पहले चरण में 13 वर्षीय विवेक को चुना गया। डॉ. देवकर ने नेत्रदान में प्राप्त कॉर्निया की पांच परतों में से केवल एक परत को प्रत्यारोपित करने की अत्याधुनिक और जटिल ‘डीमैक’ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

घर में लौटा खुशियों का उजाला

​सर्जरी के एक माह बाद शुक्रवार को जांच के दौरान पाया गया कि विवेक को ऑपरेशन वाली आंख से लगभग 50% दिखाई देने लगा है। डॉक्टरों के अनुसार, समय के साथ दृष्टि का यह प्रतिशत और बढ़ेगा। बरसों बाद दुनिया और अपने परिवार को सामने देख विवेक और उसका पूरा परिवार भावुक हो उठा। पीड़ित परिवार ने शाइन इंडिया फाउंडेशन, डॉक्टरों और नेत्रदानी परिवारों का सहृदय आभार व्यक्त किया है। साथ ही, समाज से अपील की है कि सभी को नेत्रदान के पवित्र कार्य के लिए आगे आना चाहिए।

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