जनसुनवाई से मिला नया जीवन: जन्म से मूक-बधिर जतिन अब बोलेगा भी और सुनेगा भी

झालावाड़ में जन अभियोग निराकरण समिति के प्रयासों से हुआ 9 लाख का सफल ऑपरेशन; 4 साल बाद घर पहुंचे जनप्रतिनिधि को देख भावुक हुआ परिवार

भवानीमंडी ( जगदीश पोरवाल )

“जतिन अब बोलेगा भी और सुनेगा भी” — करीब चार साल पहले जन अभियोग निराकरण समिति के सदस्य राजेश गुप्ता करावन द्वारा दिया गया यह भरोसा आज पूरी तरह हकीकत में बदल चुका है। जन्म से ही सुनने और बोलने में असमर्थ बकानी कस्बे के मासूम जतिन के जीवन में आखिरकार खुशियों ने दस्तक दे दी है। सरकारी योजनाओं और जनप्रतिनिधियों के संवेदनशील प्रयासों की बदौलत आज जतिन न सिर्फ दूसरों की बातें सुन पा रहा है, बल्कि बेबाकी से उनका जवाब भी दे रहा है।

निराशा के बीच जनसुनवाई बनी उम्मीद की किरण

​जतिन के माता-पिता अपने मासूम बेटे के इलाज के लिए वर्षों तक दर-दर भटकते रहे। हर जगह से निराशा हाथ लगने के बाद वे लगभग अपनी उम्मीद खो चुके थे। आखिरकार, उन्होंने झालरापाटन में आयोजित उपखंड स्तरीय जनसुनवाई में पहुंचकर अपनी फरियाद रखी।

​जनसुनवाई के दौरान मामले की गंभीरता को देखते हुए जन अभियोग निराकरण समिति के सदस्य राजेश गुप्ता करावन ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और बच्चे के इलाज की पूरी जिम्मेदारी उठाने का भरोसा दिया।

“जब जतिन के घर पहुंचे जनप्रतिनिधि…”

हाल ही में जतिन के परिजनों के विशेष आग्रह पर राजेश गुप्ता करावन उसके घर पहुंचे। जब उन्होंने जतिन से बात की, तो बालक ने बेहद स्पष्ट और बेबाकी से जवाब दिए। इस भावुक पल को देखकर वहां मौजूद माता-पिता और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं।

सरकारी सहायता से हुआ ₹9 लाख का मुफ्त इलाज

​मामले को हाथ में लेने के बाद राजेश गुप्ता ने प्रकरण को तुरंत सरकार तक पहुंचाया। सरकारी योजनाओं के समन्वय से जतिन की समुचित चिकित्सा व्यवस्था शुरू की गई। अंततः 18 दिसंबर 2022 को जतिन का सफल ऑपरेशन हुआ। इस जटिल चिकित्सा प्रक्रिया में लगभग 8 से 9 लाख रुपए का खर्च आया, जिसे पूरी तरह सरकारी सहायता के माध्यम से वहन किया गया।

परिजनों ने जताया आभार

​जतिन के माता-पिता ने जन अभियोग निराकरण समिति के अध्यक्ष पुखराज पाराशर एवं सदस्य राजेश गुप्ता करावन का सहृदय आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि अगर जनसुनवाई का मंच और इन जनप्रतिनिधियों का संवेदनशील रवैया न होता, तो शायद उनका बेटा कभी सामान्य जीवन नहीं जी पाता।

​यह पूरी घटना आज के दौर में सरकारी जनसुनवाई व्यवस्था की संवेदनशीलता और जनप्रतिनिधियों के सकारात्मक एवं मानवीय प्रयासों का एक जीवंत और अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरी है।

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