जगदीश पोरवाल
बढ़ती महंगाई और आसमान छूते खाद्य तेल के दामों के बीच भाजपा महिला मोर्चा ने इसका एक अनोखा ‘इलाज’ ढूंढ निकाला है। जयपुर के वैशाली नगर में बकायदा एक ‘लाइव किचन’ वर्कशॉप रखकर महिलाओं को बिना तेल की पनीर सब्जी, राब और सैलेड बनाना सिखाया गया।
कुकिंग एक्सपर्ट्स के हवाले से नया ज्ञान बांटा गया है कि स्वादिष्ट खाने के लिए तेल की नहीं, बल्कि ‘सही तकनीक’ की जरूरत होती है। मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष राखी राठौड़ ने तो इसे सीधे देशहित से जोड़ते हुए कहा कि तेल कम खाओगे, तो देश का आयात घटेगा और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी!
इस पूरे घटनाक्रम और सरकारी लॉजिक पर कार्टूनिस्ट अशोक का एक कार्टून बिल्कुल सटीक बैठता है:
- दावा: एक तरफ नेताजी हाथ में तख्ती लिए नारा बुलंद कर रहे हैं— “कम तेल की थाली, स्वस्थ भारत की खुशहाली।”
- हकीकत: दूसरी तरफ महंगाई की मार झेल रहा एक गरीब, फटेहाल दंपत्ति खड़ा है।
- सटीक प्रहार: नेताजी का यह ‘लाइव किचन ज्ञान’ सुनकर गरीब पति हाथ जोड़कर बेबाकी से कहता है— “आप कम तेल को योग बता रही हैं, हम तो बरसों से इसे मजबूरी का दूसरा नाम कहते हैं!
- आ कड़वा सच: राजनीति की कला देखिए— कल तक जो महंगाई जनता का तेल निकाल रही थी, आज उसे ही ‘देशहित और फिटनेस प्लान’ बताकर थाली में परोसा जा रहा है। जनता अब असमंजस में है कि रसोई का बजट बिगड़ने पर रोए या बिना तेल वाले पनीर का स्वाद लेकर सरकार का

