भवानीमंडी। ( जगदीश पोरवाल ) श्री राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट द्वारा बेची गई दुकान का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस मामले में एक ऐसा तकनीकी पेच फंस गया है, जिसने प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है। देवस्थान विभाग कोटा द्वारा रजिस्ट्री के साथ संलग्न किए गए नक्शे में तारीखों का एक बड़ा विरोधाभास सामने आया है, जिसके बाद विभाग ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।
क्या है तारीखों का पूरा ‘खेल’?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दुकान की रजिस्ट्री के साथ जो नक्शा लगाया गया है, उस पर विक्रेता (ड्राफ्ट्समैन/नक्शा लेखक) द्वारा 10 मई दर्शीयी जाने की बात सामने आई है। चौंकाने वाली बात यह है कि मंदिर ट्रस्ट द्वारा दुकान की नीलामी 18 मई को की गई थी और इसकी रजिस्ट्री 19 मई को करवाई गई थी।
बड़ा सवाल: जब नीलामी ही 18 मई को हुई, तो उसका नक्शा 8 दिन पहले यानी 10 मई को कैसे तैयार और हस्ताक्षरित हो गया? क्या नीलामी की प्रक्रिया सिर्फ एक औपचारिकता थी और सब कुछ पहले से तय था?
देवस्थान विभाग सख्त;
नगरपालिका ईओ को 7 दिनो में नक्शे की जांच कर रिपोर्ट देने के आदेश दिये
इस गंभीर गड़बड़ी को देखते हुए देवस्थान विभाग कोटा के सहायक आयुक्त के. के. खंडेलवाल ने कड़ा रुख अपनाया है। विभाग की ओर से भवानीमंडी नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (EO) को एक पत्र जारी कर पूरे मामले की जांच करने और 7 दिन के भीतर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए गए हैं।
इसके साथ ही, नगर पालिका से ड्राफ्ट्समैन के अनुबंध को लेकर भी तीखे सवाल पूछे गए हैं:
क्या नक्शा बनाने वाले ड्राफ्ट्समैन का नगर पालिका से कोई आधिकारिक अनुबंध है?
यदि अनुबंध है, तो वह किन शर्तों पर आधारित है?
क्या इस नक्शे का निर्धारित शुल्क पालिका में जमा कराया गया था या नहीं?
ट्रस्ट से भी मांगा स्पष्टीकरण
सहायक आयुक्त ने केवल नगर पालिका ही नहीं, बल्कि श्री राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट को भी नोटिस थमाकर जवाब तलब किया है। ट्रस्ट से पूछा गया है कि नीलामी और रजिस्ट्री से पहले ही नक्शे पर 10 मई की तारीख दर्ज होने के पीछे का सच क्या है? इसका लिखित स्पष्टीकरण जल्द से जल्द विभाग को भेजा जाए।
रिपोर्ट के बाद होगी न्यायिक कार्रवाई
नगर पालिका और मंदिर ट्रस्ट के स्पष्टीकरण के बाद ही इस मामले में आगे की न्यायिक कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में यह साबित हो जाता है कि नक्शा वाकई 10 तारीख को ही (नीलामी से पहले) बना दिया गया था, तो इसे नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। आगे की पूरी कार्रवाई भवानीमंडी अधिशासी अधिकारी की जांच रिपोर्ट पर टिकी है।”
के. के. खंडेलवाल, सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग (कोटा)

