भवानीमंडी। ( जगदीश पोरवाल )पर्यावरण संरक्षण और बिजली बिलों से मुक्ति के लिए सरकार द्वारा बढ़ावा दी जा रही ‘नेट मीटरिंग योजना’ (सोलर रूफटॉप) भवानीमंडी में बेहद कामयाब साबित हो रही है। जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के भवानीमंडी उप-खंड (AEN कार्यालय) से सामने आए ताजा आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि क्षेत्र के लोग अब पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम कर आत्मनिर्भर ‘ऊर्जा उत्पादक’ बन रहे हैं।
विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 (अप्रैल से मार्च) के दौरान भवानीमंडी क्षेत्र में सोलर पैनलों के जरिए रिकॉर्ड 19,22,618 यूनिट (19.22 लाख KWH) ग्रॉस सोलर बिजली का उत्पादन किया गया है।
घरेलू उपभोक्ताओं को दोहरा फायदा: ₹6.91 लाख की हुई सीधी कमाई
सोलर पैनल लगाने में सबसे आगे कस्बे के घरेलू (Domestic) उपभोक्ता रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक:
भवानीमंडी उप-खंड में कुल 138 घरेलू उपभोक्ताओं ने अपने घरों पर सोलर सिस्टम इंस्टॉल करवाए हैं, जिनकी कुल क्षमता 666.7 किलोवाट (KW) है।
इन घरेलू उपभोक्ताओं ने सालभर में 7.43 लाख यूनिट से अधिक सौर ऊर्जा का उत्पादन किया।
इसमें से अपनी जरूरत पूरी करने के बाद उपभोक्ताओं ने 2,12,233 यूनिट बिजली विभाग को ग्रिड के माध्यम से वापस बेची (Export की)।
₹3.26 प्रति यूनिट की दर से विद्युत विभाग द्वारा इन उपभोक्ताओं को कुल ₹6,91,882.58 का भुगतान किया गया, जो या तो उनके बिलों में समायोजित हुआ या उनके खातों में आया।
सालाना सोलर ‘रिपोर्ट कार्ड’: श्रेणीवार आंकड़े (कॉलम विवरण)
1. घरेलू श्रेणी (Domestic)
कुल उपभोक्ता: 138
कुल स्थापित क्षमता: 666.7 किलोवाट (KW)
कुल वार्षिक सोलर उत्पादन: 7,43,568.0 यूनिट (KWH)
विभाग को बेची गई बिजली (Export): 2,12,233.92 यूनिट
2. गैर-घरेलू / व्यावसायिक श्रेणी (Non-Domestic)
कुल उपभोक्ता: 31
कुल स्थापित क्षमता: 781.0 किलोवाट (KW)
कुल वार्षिक सोलर उत्पादन: 6,29,606.4运行 यूनिट (KWH)
विभाग को बेची गई बिजली (Export): 3,23,911.56 यूनिट
3. बड़ी इकाइयाँ (Large Industry)
कुल उपभोक्ता: 2
कुल स्थापित क्षमता: 450.0 किलोवाट (KW)
कुल वार्षिक सोलर उत्पादन: 4,36,516.8 यूनिट (KWH)
विभाग को बेची गई बिजली (Export): 2,54,913.60 यूनिट
4. लघु उद्योग (Small Industry)
कुल उपभोक्ता: 4
कुल स्थापित क्षमता: 40.0 किलोवाट (KW)
कुल वार्षिक सोलर उत्पादन: 47,172.0 यूनिट (KWH)
विभाग को बेची गई बिजली (Export): 2,54,913.60 यूनिट
5. थोक उपभोक्ता (Bulk)
कुल उपभोक्ता: 2
कुल स्थापित क्षमता: 45.0 किलोवाट (KW)
कुल वार्षिक सोलर उत्पादन: 38,755.2 यूनिट (KWH)
विभाग को बेची गई बिजली (Export): 14,880.00 यूनिट
6. मध्यम उद्योग (Medium Industry)
कुल उपभोक्ता: 2
कुल स्थापित क्षमता: 45.0 किलोवाट (KW)
कुल वार्षिक सोलर उत्पादन: 27,000.0 यूनिट (KWH)
विभाग को बेची गई बिजली : 12,498.00 यूनिट
कुल योग : भवानीमंडी उप-खंड में कुल 179 सक्रिय उपभोक्ताओं की 2027.7 किलोवाट (2 मेगावाट) क्षमता ने मिलकर कुल 19,22,618.4 यूनिट बिजली बनाई, जिसमें से 11,53,732.44 यूनिट बिजली ग्रिड को वापस एक्सपोर्ट की गई।
पर्यावरण और जेब दोनों के लिए वरदान
विद्युत विभाग के अधिकारी मोहनलाल मेघवाल तथा खेमराज गुप्ता का कहना है कि भवानीमंडी में वर्तमान में 2 मेगावाट से अधिक क्षमता के सोलर पैनल सक्रिय हैं। इनसे पैदा होने वाली क्लीन एनर्जी से न सिर्फ कोयले पर आधारित बिजली की खपत कम हो रही है और पर्यावरण सुरक्षित हो रहा है, बल्कि उपभोक्ताओं के घरों और फैक्ट्रियों का बिजली बिल भी शून्य की ओर बढ़ रहा है। सरकार की सब्सिडी योजनाओं और भवानीमंडी के जागरूक नागरिकों के चलते आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
सोलर लगाने वाले उपभोक्ताओं को बचत हो रही है एलपीजी गैस की
जिन-जिन घरेलू उपभोक्ताओं ने सोलर पैनल लगाए हैं वह अब एलपीजी गैस सिलेंडर की जगह इलेक्ट्रिक इंडक्शन का उपयोग करने लगे हैं । घर का खाना चाय बनाना आदि में इंडक्शन का उपयोग किया जा रहा है ,जिससे उनके घरों में गैस की बचत भी होने लगी है । एक सोलर पैनल उपभोक्ता ने बताया कि जो एलपीजी गैस सिलेंडर पहले 25 दिन चलता था अब वह लगभग डेढ़ माह चल रहा है ।
सोलर पैनल लगाने वाले प्रीत सिंह का अनुभव
अपनी दुकान पर 10 किलो वाट का सोलर पैनल लगाने वाले प्रीतपाल सिंह का कहना है कि सोलर पैनल लगाने से उपभोक्ताओं को काफी फायदा होता है ,मेरे बिजली का बिल जो 8 से 10000 रुपये प्रति माह आ रहा था अब फिक्स चार्ज 2 से 3 हजार रुपए के बीच आ रहा है ।साथ ही वह गुरु गोविंद सिंह सभा के अध्यक्ष भी है उन्होंने गुरुद्वारे में 18 किलोवाट का सोलर पैनल लगाया गया जहां पर भी 10 से 12000 रुपये का बिल आता था अब केवल फिक्स चार्ज का ही बिल आ रहा है ।दोनों ही स्थान पर कमर्शियल कनेक्शन है ।इसलिए इन पर साल भर में बची हुई युनिट लेप्स हो जाती है ,जबकि घरेलू सोलर पैनल लगाने वाले को सरकार द्वारा बची हुई यूनिट का भुगतान किया जाता है ।

