भवानीमंडी (झालावाड़)। भैसोदामंडी तिरुपति नगर निवासी श्रीमती राजुल जी चेलावत (उम्र लगभग 75 वर्ष), धर्मपत्नी स्व. श्री सज्जन सिंह जी चेलावत (रामपुरा वाले), मृत्यु को महोत्सव बनाने के भावों के साथ अपनी अंतिम साधना (संथारा) की ओर अग्रसर हैं। पूर्ण चेतना और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ चल रहे उनके इस संलेखना संथारे के साथ आज (27 मई) उनकी 24 उपवास की कठिन तपस्या जारी है।
गुरु भगवंतों की निश्रा में ग्रहण किए प्रत्याख्यान
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, श्रीमती चेलावत ने ज्ञानगच्छाधिपति श्रुतधर पंडित रत्न परम पूज्य गुरुदेव श्री प्रकाशचंद्र जी म.सा. की आज्ञानुवर्तिनी साध्वी प्रमुखा पूज्या श्री गुणी मैया अरविन्द कुंवर जी म.सा. की सुशिष्या पूज्या श्री राजेश कंवर जी म.सा. एवं पूज्या श्री मनीषा जी म.सा. के मुखारविंद से परिवार की साक्षी में गत 04 मई 2026 को सागारी संथारे के प्रत्याख्यान ग्रहण किए थे। इसके पश्चात, पूर्ण जागृति के साथ सभी प्रकार के आरंभ और परिग्रहों का त्याग करते हुए उन्होंने दिनांक 22 मई 2026 को पूज्या महासती जी से यावज्जीवन (जीवनपर्यन्त) संलेखना संथारा अंगीकार कर लिया।
समाज में हर्ष और वंदन का माहौल
श्रीमती राजुल जी चेलावत, श्री माणक जी व श्री विमल जी चेलावत की भाभीसा; रविन्द्र, नवीन, स्व. संजय व अजय चेलावत की काकीसा; दिनेश जी छाजेड़ की सासुजी; प्रिया व प्रखर की नानीसा एवं शोभना जी छाजेड़ की वीर माता हैं।
जीवन भर की जैन आराधना के बाद इस कठिन व सर्वोच्च अंतिम साधना पथ पर बढ़ती साधक आत्मा के दर्शन और वंदन के लिए समाजजन उनके निवास स्थान (जैन किराना व जनरल स्टोर, तिरुपति नगर, ज्ञान विहार रोड, भैसोदामंडी) पहुँच रहे हैं। संपूर्ण जैन समाज इस घोर तपस्या और आत्म-साधना की अनुमोदना कर रहा है।

