भ
करोड़ों की मंदिर संपत्ति कौड़ियों में बेचने का आरोप; रजिस्ट्री निरस्त करने की उठी मांग
देवस्थान विभाग और मंदिर प्रबंधन के खिलाफ फूटा सर्व हिंदू समाज का गुस्सा, उपखंड अधिकारी को सौंपा ज्ञापन
भवानीमंडी (जगदीश पोरवाल)। स्थानीय रेलवे स्टेशन रोड स्थित सार्वजनिक श्री राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट की एक मूल्यवान दुकान को कथित मिलीभगत और नियमों को ताक पर रखकर बेचे जाने का मामला अब पूरी तरह गरमा चुका है। इस विवादित सौदे के विरोध में बुधवार को भगवान श्री राधेश्याम के भक्तों और ‘सर्व हिंदू समाज मंदिर रक्षा समिति’ के बैनर तले एक विशाल ‘जन आक्रोश वाहन रैली’ निकाली गई। रैली में शामिल श्रद्धालुओं ने देवस्थान विभाग और मंदिर प्रबंधन के खिलाफ जमकर आक्रोश व्यक्त किया।
3 किलोमीटर लंबी रैली में गूंजे तानाशाही के खिलाफ नारे
यह जनाक्रोश रैली पचपहाड़ रोड स्थित श्री राधेश्याम मंदिर की बगीची से प्रारंभ हुई। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और प्रबुद्ध नागरिक अपने दुपहिया व चार पहिया वाहनों के साथ शामिल हुए। करीब 3 किलोमीटर का सफर तय कर यह रैली शहर के विभिन्न मुख्य मार्गों से होते हुए उपखंड कार्यालय पहुंची। रैली के दौरान आक्रोशित भक्त “दुकान की रजिस्ट्री निरस्त करो” और “अध्यक्ष तेरी तानाशाही नहीं चलेगी” जैसे गगनभेदी नारे लगा रहे थे।
उपखंड अधिकारी को सौंपा कलेक्टर के नाम ज्ञापन, जांच का आश्वासन
उपखंड कार्यालय पहुंचने के बाद समिति के पदाधिकारियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने उपखंड अधिकारी (SDM) श्रद्धा गोमे को जिला कलेक्टर तथा आयुक्त (देवस्थान विभाग, जयपुर) के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
उपखंड अधिकारी का रुख: ज्ञापन लेने के बाद उपखंड अधिकारी श्रद्धा गोमे ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि, “मैं इस पूरे प्रकरण के संदर्भ में देवस्थान विभाग से चर्चा कर जल्द ही दस्तावेज मंगाऊंगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”
करोड़ों की संपत्ति कौड़ियों में! ये हैं गड़बड़ी के 3 मुख्य आरोप
सौंपे गए ज्ञापन में सर्व हिंदू समाज मंदिर रक्षा समिति ने इस पूरे सौदे में गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं:
बाजार मूल्य से बेहद कम में सौदा: आरोप है कि जिस दुकान का वास्तविक बाजार मूल्य ₹1 करोड़ से अधिक है, उसे देवस्थान विभाग के अधिकारियों से कथित मिलीभगत कर गत 19 मई 2026 को महज ₹65 लाख में ही बेच दिया गया।
गुपचुप तरीके से नीलामी: दुकान में वर्तमान में किराएदार मौजूद होने के बावजूद विभाग ने बेहद गोपनीय तरीके से कार्रवाई की। नियमों का उल्लंघन करते हुए बिना किसी प्रमुख समाचार पत्र में विज्ञप्ति जारी किए या नगरपालिका/SDM कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर सूचना चस्पा किए बिना ही नीलामी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई।
समय से पहले ही खेल खत्म: देवस्थान विभाग ने गत 8 मई को जो नोटिस जारी किया था, उसकी वैधानिक अवधि 8 जून को पूरी होनी थी। परंतु, नियमों को ताक पर रखकर अवधि समाप्त होने से पहले ही 18 मई को गुपचुप तरीके से नीलामी संपन्न करवा दी गई। यही नहीं, नीलामी से भी पहले (10 मई को) दुकान का नक्शा क्रेता-विक्रेता के संयुक्त नाम से बनवा लिया गया था, जो पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बनाता है।
सर्वदलीय और प्रबुद्ध वर्ग का मिला समर्थन
इस आंदोलन की रूपरेखा पूर्व में 26 मई को जैन बोर्डिंग में आयोजित एक आवश्यक बैठक में तैयार की गई थी। बुधवार को रैली और ज्ञापन देने के दौरान प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:
समिति व ट्रस्ट प्रतिनिधि: समिति के संरक्षक डॉ. जगदीशचंद अरोड़ा, राधेश्याम मंदिर ट्रस्टी दामोदर कचोलिया।
व्यापार मंडल: भवानीमंडी व्यापार महासंघ के पूर्व अध्यक्ष राजेश नाहर व प्रीतपाल सिंह।
राजनीतिक एवं सामाजिक चेहरे: नगर कांग्रेस अध्यक्ष विनय आस्तोलिया, पूर्व नगर कांग्रेस अध्यक्ष कालूलाल सालेचा व प्रमोद जैन, डग विधानसभा क्षेत्र के पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी चेतन गहलोत, पोरवाल समाज के राजकुमार खरड़िया, ग्रेन एंड सिंड्स मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुदीप सालेचा,राजेश नागर,प्रदीप शर्मा,सुमित सेठिया,नितिन मालपानी,अशीष लड्ढा ,दीपक सोनी,लक्की मारवाड़ी ,पुष्पेंद्र सिंह चौहान ,विवेक जैन (पिंटू), विकास जैन, मुकेश जैन, और दिलीप सोलंकी आदि सहित सैकड़ो मंदिर के भक्तगण शामिल थे।
श्रद्धालुओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस अवैध रजिस्ट्री को निरस्त कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
चर्चा के केंद्र में रहे दो मुख्य बिंदु:
1. हिंदूवादी संगठनों की दूरी पर उठे सवाल:
रैली के दौरान शहर में यह चर्चा का विषय बना रहा कि मंदिर और धर्म से जुड़ा मामला होने और आंदोलन के गैर-राजनीतिक होने के बावजूद भाजपा, आरएसएस (RSS), और विश्व हिंदू परिषद (VHP) जैसे प्रमुख संगठनों इक्का दुक्का प्रतिनिधि इस जनाक्रोश रैली में नजर नहीं आया।
2. सोशल मीडिया पर अध्यक्ष की सफाई:
बुधवार सुबह रैली शुरू होने से पहले राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के.के. राठी ने कई लोगों और व्हाट्सएप ग्रुपों में व्यक्तिगत मैसेज डालकर मंदिर प्रबंधन का पक्ष रखा। रैली के दौरान लोग एक-दूसरे को मोबाइल पर अध्यक्ष द्वारा भेजे गए इन संदेशों को दिखाते और चर्चा करते नजर आए।


