भवानीमंडी। ठाकूर जी श्री राधेश्याम मंदिर की बहुमूल्य संपत्ति को कथित तौर पर गुपचुप तरीके से और कम दामों में बेचे जाने का मामला गहराता जा रहा है। इस संदेहास्पद सौदे और मंदिर की धरोहर को बचाने के लिए नगर के प्रबुद्ध नागरिकों ने ‘मंदिर बचाओ संघर्ष समिति’ का गठन किया है। इस विवाद के स्थायी समाधान और रजिस्ट्री को निरस्त (कैंसल) करवाने की आगामी रणनीति तय करने के लिए आज, 26 मई को शाम 8:00 बजे जैन बोर्डिंग परिसर में एक आवश्यक महाबैठक बुलाई गई है।
50 लाख रुपए के सीधे घाटे और गोपनीय नीलामी का आरोप
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का आरोप है कि एक करोड़ रुपये से ज्यादा की मंदिर संपत्ति की नीलामी बेहद गोपनीय तरीके से की गई और सबूतों को छुपाने की जल्दबाजी में 65 लाख रुपये में बेचकर मंदिर को सीधे तौर पर ₹50 लाख से अधिक का घाटा पहुंचाया गया है। समिति ने इस पूरे घटनाक्रम को सनातन समाज की आस्था पर कुठाराघात बताया है।

”मंदिर की रक्षा केवल 9 ट्रस्टियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का धर्म है। सोशल मीडिया पर आक्रोश जताने का समय निकल चुका है, अब इस मामले में ठोस कानूनी कदम और धरातल पर संघर्ष की बारी है।”
— मंदिर बचाओ संघर्ष समिति, भवानीमंडी
व्यापार महासंघ और वरिष्ठ नागरिकों का मिला समर्थन
इस मुहिम को धार देने के लिए नगर के वरिष्ठ अधिवक्ता, व्यापारी वर्ग और मंदिर ट्रस्ट के सदस्य भी आगे आए हैं। आज शाम होने वाली इस महाबैठक में आगामी कानूनी कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जाएगी। संघर्ष समिति ने नगर के सभी जागरूक नागरिकों, व्यापारी बंधुओं, मातृशक्ति और धर्मप्रेमियों से भारी संख्या में पहुंचने की अपील की है।
बैठक का विवरण:
दिनांक: आज (26 मई, 2026)
समय: शाम 8:00 बजे
स्थान: जैन बोर्डिंग परिसर, भवानीमंडी
प्रमुख निवेदक व संघर्ष समिति सदस्य:
इस संघर्ष की अगुवाई डॉ. जे.के. अरोड़ा, वरिष्ठ अधिवक्ता ईश्वर चंद्र भटनागर, राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य दामोदर कचोलिया, भवानीमंडी व्यापार महासंघ के वर्तमान अध्यक्ष गिरीश सोमानी, और पूर्व अध्यक्ष द्वय राजेश नाहर व प्रीतपाल सिंह कर रहे हैं। समिति का दावा है कि सच्चाई की जीत होगी और मंदिर की संपत्ति को हर हाल में सुरक्षित किया जाएगा।

