राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट की दुकान नीलामी का मामला: रजिस्ट्री के पन्नों ने खोली तारिखो में विरोधाभास की पोल!

​भवानीमंडी।
स्टेशन रोड के समीप स्थित राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट की एक दुकान को बेचने का मामला अब पूरी तरह से उलझन में फंसता नजर आ रहा है। किराएदार के कब्जे वाली इस बेशकीमती दुकान के बेचान को लेकर रोज नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।
​अब उप-पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) कार्यालय पचपहाड़ में दर्ज मूल बिक्री पत्र (रजिस्ट्री) और ड्राफ्टमैन के नक्शे की प्रमाणित प्रतियों ने यह साफ कर दिया है कि ‘खुली नीलामी’ महज एक दिखावा थी, जबकि खेल पर्दे के पीछे बहुत पहले ही फिक्स हो चुका था।

24 घंटे में नीलामी से रजिस्ट्री तक का ‘सुपरफास्ट’ खेलसामने आए

आधिकारिक दस्तावेजों (बिक्री पत्र) के अनुसार, ट्रस्ट और क्रेता ने मिलकर इतनी जल्दबाजी दिखाई जो खुद-ब-खुद मिलीभगत की गवाही दे रही है:

​18 मई 2026: देवस्थान विभाग के अधिकारी (निरीक्षक) बृजेश कुमार की मौजूदगी में “खुली नीलामी” की कागजी प्रक्रिया दिखाई जाती है।

​19 मई 2026: महज 24 घंटे के भीतर विक्रेता (ट्रस्ट) द्वारा क्रेता के नाम आनन-फानन में रजिस्ट्री भी करवा दी जाती है।

सबसे बड़ा विरोधाभास:

नीलामी से 8 दिन पहले ही बन गया था नक्शा!
​इस पूरे कथित षड्यंत्र की पोल रजिस्ट्री के साथ संलग्न साइट प्लान (नक्शे) ने खोल दी है, जिसमें तारीखों का एक बड़ा झोल सामने आया है:

​तारीख का बड़ा झोल:

ड्राफ्टमैन द्वारा यह नक्शा 10 मई 2026 को ही तैयार कर दिया गया था।
​अग्रिम हस्ताक्षर: सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि 10 मई के इस नक्शे पर विक्रेता (ट्रस्ट अध्यक्ष कृष्ण कुमार राठी) और क्रेता (मुकेश शर्मा) दोनों के बाकायदा हस्ताक्षर हैं।

​सुलगता सवाल:

जब देवस्थान विभाग के सामने कथित खुली नीलामी 18 मई को हुई, तो ठीक 8 दिन पहले यानी 10 मई को ही ट्रस्ट को कैसे पता चल गया कि उच्चतम बोली मुकेश शर्मा ही लगाएंगे? नीलामी से पहले ही क्रेता का नाम तय हो जाना और नक्शे पर दोनों पक्षों के दस्तखत हो जाना यह संकेत देता है कि दुकान को ठिकाने लगाने के लिए पहले से ही ‘फिक्सिंग’ की जा चुकी थी ?

देवस्थान विभाग की भूमिका सवालों में;

रजिस्ट्री में तारीखों के विरोधाभास को लेकर देवस्थान विभाग सहायक आयुक्त के के खंडेलवाल (कोटा) बोले- यह मामला मेरी जानकारी में नहीं आया है ‘जांच करवाता हूँ’ । उन्होंने कहा की​ इस गंभीर और संदेहास्पद मामले को लेकर मौके पर भेजे गए निरीक्षक बृजेश कुमार से पूरी प्रक्रिया की जानकारी ली जाएगी । यदि दस्तावेजों में इस तरह का कोई विरोधाभास या तारीखों की गंभीर हेराफेरी पाई जाती है, तो मैं उनसे तुरंत पूरी रिपोर्ट तलब करूँगा। आखिर नीलामी से पहले नक्शा और हस्ताक्षर कैसे संभव हैं? इस पूरे विषय की तथ्यात्मक स्थिति मालूम की जाएगी, ऐसा नियम विरुद्ध काम बिल्कुल नहीं होना चाहिए।”

नपा के अधिकृत ड्राफ्टमैन का पक्ष

​इस पूरे मामले पर नगरपालिका के नक्शा बनाने वाले अधिकृत ड्राफ्टमैन उमेश कांतीवाल ने सफाई देते हुए कहा:
​”नक्शे के ड्राफ्ट की तारीख गलती से 10 मई 2026 लिखने में आ गई है, जबकि मेरे द्वारा यह नक्शा 18 मई 2026 को ही बनाया गया था। इसका जल्द ही सुधार करवा दिया जाएगा।”

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