साधु-साध्वियों के साथ बढ़ रही दुर्घटनाओं के विरोध में सकल जैन समाज ने निकाली बाइक रैली, सौंपा ज्ञापन

भवानीमंडी (झालावाड़)।

देशभर में जैन साधु-साध्वियों के साथ बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं और अप्रिय घटनाओं को लेकर भवानीमंडी के सकल जैन समाज में गहरा आक्रोश है। इसके विरोध स्वरूप समाजजनों ने नगर में एक विशाल मौन जुलूस और बाइक रैली निकालकर उपखंड अधिकारी (SDM) को ज्ञापन सौंपा। यह कदम हाल ही में मध्य प्रदेश के रीवा में दो जैन आर्यिका माताजी की एक दुर्घटना में हुई असामयिक मृत्यु और देश के अन्य हिस्सों में संतों के साथ हो रही घटनाओं के विरोध में उठाया गया।

प्रमुख मार्गों से गुजरी रैली, हाथों में थामी तख्तियां

​यह रैली नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर से प्रारंभ हुई। रैली में बड़ी संख्या में समाजजन हाथों में जैन ध्वज और संतों की सुरक्षा से जुड़े नारों की तख्तियां लेकर चल रहे थे। बाइक रैली नगर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए उपखंड कार्यालय पहुंची, जहां समाज के प्रतिनिधियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए सरकार से सख्त ‘संत सुरक्षा नीति’ लागू करने की पुरजोर मांग की।

रीवा की घटना से समाज में गहरी वेदना: टीकम जैन

​सकल जैन समाज के अध्यक्ष टीकम जैन चांदवाड़ ने बताया कि मध्य प्रदेश के रीवा में दो जैन आर्यिका माताजी की जानबूझकर की गई गाड़ी से दुर्घटना में असामयिक मौत हो गई। इस घटना से पूरे देश के जैन समाज में अत्यंत दुख और गहरी वेदना व्याप्त है। इसी के विरोध में मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के नाम उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया है।

​”जैन समाज सदैव शांति, अहिंसा, कानून और संवैधानिक मर्यादाओं में विश्वास रखता है। हमारा उद्देश्य भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना है। प्रशासन को इस संवेदनशील विषय को गंभीरता से लेना होगा।”

टीकम जैन चांदवाड़, अध्यक्ष, सकल जैन समाज

ज्ञापन में रखी गईं यह 5 प्रमुख मांगें:

​समाजजनों द्वारा सरकार के समक्ष त्वरित कार्रवाई के लिए पांच सूत्रीय मांगें रखी गईं:

  1. निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच: रीवा (मप्र) में हुई घटना की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए।
  2. संत सुरक्षा प्रोटोकॉल: देश भर में विहार कर रहे साधु-साध्वियों के लिए तत्काल ‘संत सुरक्षा प्रोटोकॉल’ लागू हो।
  3. राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति: संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत ‘राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति’ बनाई जाए।
  4. विशेष संवेदनशील श्रेणी: संतों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी (Special Sensitive Category) में रखा जाए।
  5. समन्वय तंत्र की स्थापना: संतों के विहार और सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन एवं जैन समाज के बीच एक प्रभावी समन्वय तंत्र स्थापित किया जाए।

​इस दौरान भवानीमंडी क्षेत्र के सकल जैन समाज के पदाधिकारी, युवा और प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में संतों की सुरक्षा के लिए सरकार से त्वरित और प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!