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भवानीमंडी ( जगदीश पोरवाल ) (झालावाड़)। शहर के ऐतिहासिक और प्राचीन श्री राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट द्वारा पचपहाड़ रोड (स्टेशन रोड) स्थित ट्रस्ट के स्वामित्व की एक दुकान को गुपचुप तरीके से मात्र 65 लाख रुपये में बेचने का मामला अब पूरी तरह तूल पकड़ चुका है। इस सौदे को लेकर शहर के व्यापारियों, आम नागरिकों और कानूनी विशेषज्ञों ने पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मामला इतना बढ़ गया है कि पीड़ित दुकानदार ने मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग और पुलिस महानिदेशक सहित 16 उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। वहीं दूसरी ओर, मंदिर ट्रस्ट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
दुकानदार का आरोप: “बिना सूचना दिए औने-पौने दाम में बेची दुकान”
दुकान में पिछले 60 वर्षों से कपड़े का व्यवसाय कर रहे किराएदार सुरेश लड्ढा ने पुलिस व प्रशासन को सौंपे शिकायती पत्र में बताया कि वे नियमित रूप से ₹2804 मासिक किराया दे रहे हैं और अप्रैल 2026 तक का किराया जमा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर ट्रस्ट ने उन्हें या उनके पड़ोसियों (भगवानदास मथुरा प्रसाद व सूरजमल मानसिंह सिसोदिया) को बिना कोई सूचना या नोटिस दिए, मुकेश शर्मा नामक व्यक्ति को 65 लाख रुपये में दुकान बेच दी।
“मेरी आजीविका का एकमात्र साधन यही दुकान है। अगर ट्रस्ट को दुकान बेचनी ही थी, तो पहला हक मेरा बनता था। मैं इस दुकान के लिए 90 लाख रुपये तक देने को तैयार हूँ।
सुरेश लड्डा “किराएदार”
ट्रस्ट इसकी सार्वजनिक नीलामी करता तो मैं स्वयंइसके एक करोड़ रुपये तक दे देता। ट्रस्ट ने मिलीभगत कर मंदिर की संपत्ति को करीब 35-40 लाख रुपये का सीधा नुकसान पहुँचाया है।”
मनोज जैन (रामपुरा वाला)
दुकान के पड़ोसी
अब असामाजिक तत्व जबरन दुकान खाली करवाएंगे
दुकानदार सुरेश लड़ड़ा को अंदेशा जताया है कि उन्हें असामाजिक तत्वों के जरिए जबरन दुकान से बेदखल करने और शारीरिक नुकसान पहुँचाने की कोशिश की जा सकती है, जिससे उनका पूरा परिवार तनाव में है। उन्होंने रजिस्ट्री निरस्त करने की मांग की है।
मंदिर ट्रस्ट की सफाई: “नियमों का पालन हुआ, किराएदार पर बकाया था किराया“
विवाद बढ़ता देख श्री राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के. राठी ने शुक्रवार को मंदिर परिसर में एक पत्रकार वार्ता बुलाई। ट्रस्ट ने अपनी स्थिति साफ करते हुए कहा कि दुकान बेचने की प्रक्रिया पूरी तरह नियमानुकूल और पारदर्शी थी।
ट्रस्टियों की सहमति: अध्यक्ष ने बताया कि मंदिर के कुल 9 ट्रस्टियों में से 8 ने इस प्रस्ताव को लिखित स्वीकृति दी थी।
किराएदार पर आरोप: ट्रस्ट का दावा है कि सुरेश लड्ढा का एग्रीमेंट 3 साल पहले ही खत्म हो चुका था और उन पर 3 साल का किराया भी बकाया था।
परोक्ष सूचना: ट्रस्ट के अनुसार, दुकानदार के रिश्तेदारों के माध्यम से उन तक दुकान खरीदने का संदेश पहुँचाया गया था, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। यदि दुकान खाली होती तो इसके 75 से 80 लाख रुपए मिल सकते थे। सौदे से प्राप्त 65 लाख रुपये की राशि को मंदिर के विकास कार्यों में लगाया जाएगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता कैलाश जैन की टिप्पणी: “सार्वजनिक जीवन में सिर्फ ईमानदार होना काफी नहीं, नजर आना भी जरूरी”
इस संवेदनशील मामले पर नगर के वरिष्ठ अधिवक्ता जैन ने अपनी बेबाक कानूनी व नैतिक राय रखी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों और जनश्रुति का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक संपत्ति के मामलों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
“श्री राधेश्याम मंदिर नगर के प्राचीनतम धर्मस्थलों में से एक है, जिससे लोगों की गहरी आस्था जुड़ी है। सवा करोड़ की संपत्ति आधे दाम में बेचे जाने के आरोप हवा में तैर रहे हैं। ऐसे में ट्रस्टियों का यह नैतिक दायित्व है कि वे जनता को विश्वास में लें और अपने कार्य की पवित्रता साबित करें। सार्वजनिक जीवन में सिर्फ ईमानदार होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ईमानदार नजर आना भी जरूरी है।”
कैलाश जैन, वरिष्ठ अधिवक्ता
आखिर संपत्ति बेचने की नौबत क्यों आई!
आखिर ऐसी क्या नौबत आई की मंदिर की संपत्ति को बेचनी पड़ रही है,अगर कोई दुकानदार दुकान खाली नहीं करता है तो कानूनी और वैधानिक रूप से कार्रवाई करनी चाहिए थी , आगे भी अगर कोई दुकान खाली नहीं करेगा तो क्या हम उस संपत्ति को नीलाम कर देंगे ❓
ललित गुप्ता
व्यापारी
ट्रस्ट के काम में पारदर्शिता होनी चाहिए!
ट्रस्ट को अपने काम में पारदर्शिता रखनी चाहिए,श्री राधेश्याम मंदिर ऑलरेडी सक्षम है ,ट्रस्ट को दुकान बेचने की क्या नौबत आ गई ,इसे सार्वजनिक करना चाहिए और शहर की जनता के सामने पूरी वास्तविकता को रखना चाहिए और जो भी काम ट्रस्ट करें उसमें पारदर्शिता होनी चाहिए ।
प्रदीप शर्मा
भवानीमंडी शनि मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष
निष्कर्ष की ओर बढ़ता मामला
स्थानीय नागरिक इस बात से नाराज हैं कि यदि ट्रस्ट इस दुकान की खुली नीलामी (पब्लिक ऑक्शन) करता, तो मंदिर को 1 करोड़ रूपए से अधिक का राजस्व मिल सकता था। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय, मानवाधिकार आयोग और जिला प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या कानूनी कदम उठाते हैं। शहरवासियों को उम्मीद है कि इस पूरे प्रकरण का जल्द ही कोई न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण पटाक्षेप होगा।

