भवानीमंडी। ( जगदीश पोरवाल ) शहर के ऐतिहासिक व प्राचीन श्री राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट की स्टेशन रोड स्थित एक दुकान को ट्रस्ट अध्यक्ष द्वारा बुधवार को 65 लाख रुपये में बेचे जाने का मामला गरमा गया है। देवस्थान विभाग कोटा की अनुमति से हुई इस रजिस्ट्री के बाद सोशल मीडिया पर दिनभर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। वहीं, दूसरी ओर ट्रस्ट के ही अन्य ट्रस्टियों और कानूनी विशेषज्ञों ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आपत्ति दर्ज कराई है।
तहसीलदार ने की रजिस्ट्री की पुष्टि
पचपहाड़ तहसीलदार अब्दुल हफीज ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि 19 मई को स्टेशन रोड स्थित एक दुकान की रजिस्ट्री मुकेश कुमार (पिता सीताराम शर्मा) के नाम की गई है। यह रजिस्ट्री ट्रस्ट अध्यक्ष कृष्ण कुमार राठी के नाम पर नगर पालिका द्वारा जारी पट्टे के आधार पर की गई है। दस्तावेज के अनुसार, 12.4 × 34 (कुल 419 वर्ग फीट) आकार की इस दुकान का बेचान 65 लाख रुपये में दिखाया गया है।
10-12 साल से नहीं हुई मीटिंग, बिना सहमति कैसे बिकी दुकान: ट्रस्टी
दुकान बेचने की खबर सामने आते ही मंदिर ट्रस्ट के भीतर ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं। मंदिर के ट्रस्टी दामोदर कचोलिया ने तीखी आपत्ति जताते हुए कहा, “मुझे इस संपत्ति को बेचे जाने की कोई जानकारी नहीं है। ट्रस्ट के अध्यक्ष द्वारा ट्रस्टीयो की मीटिंग में दुकान बेचने का प्रस्ताव लिया गया तो उसकी मुझे कोई जानकारी नहीं, क्योंकि पिछले 10-12 सालों से ट्रस्ट की कोई मीटिंग ही नहीं हुई है। वर्तमान में 11 में से 9 ट्रस्टी मौजूद हैं। अगर अध्यक्ष ने बिना सबकी सहमति के दुकान बेची है, तो यह सरासर गलत है और मैं इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराता हूँ।”
नियमों का उल्लंघन, व्यक्ति के नाम पट्टा ही गलत: वरिष्ठ अधिवक्ता
शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता ईश्वर चंद भटनागर ने इस पूरे मामले को नियमों का उल्लंघन बताया है। उन्होंने दो मुख्य बिंदुओं पर सवाल उठाए:
अध्यक्ष पद की पात्रता: नियम के अनुसार, कृषि उपज मंडी का कोई व्यापारी ही श्री राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट का अध्यक्ष बन सकता है, जबकि वर्तमान अध्यक्ष की मंडी में कोई दुकान ही नहीं है। ऐसे में उनका चयन ही गलत है।
पट्टे पर वैधानिक सवाल: नगर पालिका द्वारा मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के ‘व्यक्तिगत नाम’ पर जारी पट्टा पूरी तरह अवैध है। नियमानुसार पट्टा कभी किसी व्यक्ति के नाम नहीं, बल्कि हमेशा ‘ट्रस्ट’ या ‘मंदिर की मूर्ति’ के नाम पर ही जारी हो सकता है।
देवस्थान विभाग ने कहा- प्रक्रिया के तहत दी अनुमति
इस विवाद पर कोटा देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त के.के. खंडेलवाल ने विभाग का रुख साफ करते हुए कहा कि श्री राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट द्वारा दुकान बेचने के लिए आवेदन किया गया था। ट्रस्ट ने विभाग की पूरी तय प्रक्रिया का पालन किया, जिसके आधार पर ही उन्हें अनुमति जारी की गई थी। नियम के मुताबिक, अनुमति मिलने के 1 साल के भीतर संपत्ति का बेचान किया जा सकता है।
एक-दो दिन में करूंगा खुलकर खुलासा: अध्यक्ष
विवाद और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष कृष्ण कुमार राठी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, “ट्रस्ट द्वारा यह दुकान किस कारण और किन परिस्थितियों में बेची गई है, इसका पूरा खुलासा मैं एक-दो दिन में कर दूंगा। जनता और हर व्यक्ति के मन में जो भी शंकाएं या सवाल चल रहे हैं, उन सभी का खुलकर जवाब दिया जाएगा।

