उज्ज्वला’ बनी ‘उलझवला’: अब अंगूठा लगाओ, तब जाकर रसोई में कड़ाही चढ़ाओ!



जगदीश पोरवाल

कहते हैं सरकार जब कुछ देती है तो दिल खोलकर देती है, लेकिन जब वापस लेने या ‘फिल्टर’ करने पर आती है, तो ऐसा पेंच कसती है कि जनता की ‘गैस’ निकल जाती है। राजस्थान के करीब 73 लाख उज्ज्वला गैस उपभोक्ताओं के साथ आजकल कुछ ऐसा ही “उलझवला” वाला खेल चल रहा है।
हाल ही में सरकार ने एक ऐसा नया और कड़ा नियम निकाला है कि फर्जीवाड़ा करने वाले तो कोने में बैठकर आंसू बहा ही रहे हैं, असली और जरूरतमंद उपभोक्ता भी अपने दोनों हाथों के अंगूठे और उंगलियां देख-देखकर परेशान हैं कि कहीं बायोमेट्रिक मशीन बाबा उनके निशान पहचानने से मना न कर दें!
30 जून की ‘डेडलाइन’: सब्सिडी चाहिए या नहीं?
नए सरकारी फरमान के मुताबिक, अगर आपको गैस सिलेंडर पर मिलने वाली अपनी प्यारी सब्सिडी सुरक्षित रखनी है, तो 30 जून से पहले अपने नजदीकी गैस डीलर के पास जाकर “बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन” यानी ई-केवाईसी (e-KYC) करानी ही होगी। नियम इतना सख्त है कि अगर आपने साल में सात सिलेंडर तो जैसे-तैसे ले लिए, लेकिन जैसे ही आठवें सिलेंडर की बुकिंग के लिए उंगली उठाई, तो सरकार तुरंत कहेगी—“पहले अंगूठा लगाओ, पहचान बताओ, फिर चूल्हा जलाओ!”

कार्टूनिस्ट अशोक ने इसी जमीनी हकीकत को अपने तीखे व्यंग्य से उकेरा है, जहाँ एक परेशान महिला दूसरी से कह रही है: “बहिन, पहले कहा था उज्ज्वला… अब लग रहा है ‘उलझवला योजना’।”

कई गैस कनेक्शन ऐसे चल रहे हैं ,उपभोक्ता या तो स्वर्ग सिधार चुके हैं या शहर छोड़कर जा चुके हैं।


सरकार की दूरबीन ने इस बार उन ‘अमीरों’ को भी ढूंढ निकाला है जो सालाना 10 लाख रुपये से अधिक कमाते हैं और फिर भी सब्सिडी वाले सिलेंडर का मज़ा ले रहे थे। नए नियमों ने साफ कर दिया है कि भारी-भरकम टैक्स रिकॉर्ड वालों की रसोई से सब्सिडी का सिलेंडर अब पूरी तरह गायब होने वाला है। इसके अलावा, डेटा जांच में पता चला है कि कई गैस कनेक्शन उन लोगों के नाम पर भी धड़ल्ले से चल रहे थे जो या तो स्वर्ग सिधार चुके हैं या शहर छोड़कर जा चुके हैं।

उज्जवला योजना का लाभ लेना कहीं उलझन ना बन जाए यही डर है….

सरकार का कहना है कि यह कदम पारदर्शिता लाने और फर्जीवाड़ा रोकने के लिए बेहद जरूरी था ताकि केवल वास्तविक और जरूरतमंद उपभोक्ता ही इसका लाभ उठा सकें। कदम तो नेक है सरकार, लेकिन राशन और गैस की कतारों में खड़ी जनता बस यही दुआ कर रही है कि जब वे बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा लगाएं, तो मशीन ‘सर्वर डाउन’ का बहाना बनाकर उनकी किस्मत न उलझा दे!

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