जगदीश पोरवाल
राजस्थान में इन दिनों सूर्य देवता अकेले नहीं हैं जो लोगों के पसीने छुड़ा रहे हैं। मौसम विभाग ने भले ही प्रदेश में ‘हीटवेव’ का रेड अलर्ट जारी किया हो, लेकिन बेरोजगार युवाओं और छात्र-छात्राओं के लिए तो यहाँ सालों से बारह महीने ‘लीकवेव’ का ही टॉर्चर चल रहा है। नीट पेपर लीक मामले ने राज्य के सियासी और सामाजिक पारे को उबाल पर ला दिया है।
प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट अशोक के तीखे व्यंग्य बाणों ने सूबे की इस मौजूदा हकीकत को दो बेहद सटीक चित्रों में उकेरा है।
1. हीटवेव से ज्यादा ‘लीकवेव’ का टॉर्चर, कांग्रेस का भी चढ़ा पारा
पहले कार्टून में साफ दिख रहा है कि राजस्थान में केवल प्रकृति ही आग नहीं उगल रही, बल्कि परीक्षाओं का सिस्टम भी सुलग रहा है। नेता जी फोन पर पसीना पोंछते हुए कह रहे हैं— “अजी हमारे यहाँ तो लीकवेव का भी अलर्ट है!” इस ‘लीकवेव’ की तपन ने अब सियासी गलियारों को भी गरमा दिया है। नीट पेपर लीक मामले को लेकर विपक्ष (कांग्रेस) का पारा भी सातवें आसमान पर पहुंच गया है। जहाँ आम जनता गर्मी से बचने के लिए घरों में दुबकी है, वहीं कांग्रेस के नेता इस तपती धूप में 21 मई को भाजपा प्रदेश मुख्यालय का घेराव करने सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। अब देखना यह है कि इस घेराव से सरकार की तरफ से ‘कूलिंग इफेक्ट’ आता है या सियासी गर्मी और बढ़ती है।
2. “बाढ़ ही खेत को खाए…” – जब रखवाले ही बन गए ‘मास्टरमाइंड’
कहते हैं कि जब फसलों को जानवरों से बचाना हो, तो खेत के चारों तरफ मजबूत बाड़ (तारबंदी) लगाई जाती है। लेकिन अगर वो बाड़ ही धीरे से घूमकर पूरी फसल को चबाने लगे, तो बेचारा किसान (यहाँ पढ़िए: छात्र) कहाँ जाए?
दूसरे कार्टून में इसी कड़वे सच पर करारा तंज कसा गया है। नीट परीक्षा जैसी देश की सबसे प्रतिष्ठित साख वाली व्यवस्था को संभालने वाले ‘एनटीए (NTA) के विशेषज्ञ’ ही जब इस पेपर लीक कांड के असली ‘मास्टरमाइंड’ और जादूगर निकल आएँ, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। अखबार हाथ में थामे आम आदमी का माथा ठनक गया है और वह पसीने-पसीने होकर पूछ रहा है— “जब बाड़ ही खेत को खाए, तो रखवाली कौन करे?”
युवाओं को समझ में नहीं आ रहा है अब क्या करें
राजस्थान के युवाओं को अब समझ नहीं आ रहा कि वे परीक्षा की तैयारी के लिए ‘किताबें’ खोलें या आने वाले समय में कौन सा पेपर लीक होने वाला है, इसकी ‘कुंडली’ देखें। फिलहाल तो प्रदेश ‘हीटवेव’ की लू और ‘लीकवेव’ के झटकों के बीच पिस रहा है, और समाधान दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा।

