भवानीमंडी। ( जगदीश पोरवाल ) पश्चिम मध्य रेलवे के भवानीमंडी स्टेशन पर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ रेलवे की अव्यवस्था की शिकायत दर्ज कराने पहुँचे एक स्थानीय शिक्षक को ही स्टेशन अधीक्षक के कड़े रुख का सामना करना पड़ा। न्याय की गुहार लगाने के बदले उन्हें पहले ₹260 का जुर्माना (बिना प्लेटफ़ॉर्म टिकट शुल्क) चुकाना पड़ा, जिसके बाद ही उनकी शिकायत दर्ज हो सकी।
स्टेशन अधीक्षक ने कहां की नियम सबके लिए समान है, बिना टिकट प्लेटफार्म पर आवोगे तो पेनल्टी सहित रसीद बनेगी ,इसका शिकायत पुस्तिका में शिकायत दर्ज कराने से कोई संबंध नहीं है ।
क्या है पूरा मामला?
भवानीमंडी निवासी शिक्षक गजेंद्र सिंह जादौन ने रेलवे प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं:
रात 10:45 बजे: तत्काल आरक्षण के लिए उन्होंने रात को ही रिजर्वेशन विंडो पर लाइन में अपना फॉर्म लगा दिया था।
सुबह 5:30 बजे: सुबह साढ़े पांच बजे तक उनका फॉर्म अपनी जगह पर मौजूद था।
सुबह 6:30 बजे: सुबह 8:00 बजे बुकिंग शुरू होने से करीब डेढ़ घंटा पहले ही उनका फॉर्म वहां से रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया।
जब शिक्षक ने खिड़की पर मौजूद स्टाफ से फॉर्म गायब होने की आपत्ति जताई, तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। हैरानी की बात यह है कि रिजर्वेशन काउंटर के ठीक ऊपर सीसीटीवी (CCTV) कैमरे भी लगे हुए हैं, फिर भी फॉर्म गायब हो गया। शिक्षक ने इसमें रेलवे कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका जताई है।
शिकायत करने पहुंचे तो बुला ली आरपीएफ
पीड़ित शिक्षक गजेंद्र सिंह जब इस गड़बड़ी की शिकायत लेकर स्टेशन अधीक्षक धरम सिंह मीणा के पास पहुँचे, तो मामला पूरी तरह पलट गया। पीड़ित की समस्या सुनने के बजाय स्टेशन अधीक्षक ने पहला सवाल यह दाग दिया कि वे बिना प्लेटफ़ॉर्म टिकट के अंदर कैसे दाखिल हुए?
इसके बाद तुरंत रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को मौके पर बुलाया गया और शिकायतकर्ता गजेंद्र सिंह का ₹260 का बिना-टिकट का चालान काट दिया गया।
शिकायतकर्ता का दर्द:
“फॉर्म गायब होने में रेलवे स्टाफ की मिलीभगत लगती है। जब मैं न्याय की गुहार लगाने गया, तो मुझे डराया गया। स्टेशन अधीक्षक ने कहा कि खिड़की खुलने तक आपको यहीं रहना चाहिए था। क्या एक व्यक्ति पूरी रात वहीं खड़ा रहता? ऊपर से मुझसे शिकायत दर्ज करने के बदले ₹260 वसूल लिए गए।”
स्टेशन अधीक्षक का पक्ष: ‘नियम सबके लिए समान’
इस पूरे मामले पर भवानीमंडी स्टेशन अधीक्षक धर्मसिंह मीणा ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा:
पहले आओ-पहले पाओ: तत्काल टिकट पाने के लिए सभी के लिए एक समान नियम है, चाहे वह रेलवे कर्मचारी ही क्यों न हो।
विंडो पर फॉर्म छोड़ना गलत: आप टिकट विंडो पर फॉर्म रखकर चले जाएं, यह गलत है। टिकट पाने के लिए आपको खुद विंडो की लाइन में लगना ही पड़ेगा।
जुर्माने का शिकायत से संबंध नहीं: जहाँ तक शिकायत पुस्तिका में शिकायत दर्ज करने का सवाल है, उन्हें रोका नहीं गया था। लेकिन जब वे प्लेटफ़ॉर्म पर आए, तो उनके पास न तो प्लेटफ़ॉर्म टिकट था और न ही यात्रा टिकट। इसलिए नियम के तहत ₹260 की पेनल्टी बनाई गई। इसका शिकायत दर्ज करने से कोई संबंध नहीं है।
हकीकत: तत्काल टिकट के लिए यात्रियों का कड़ा संघर्ष
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, भवानी मंडी स्टेशन पर तत्काल टिकट पाने के लिए यात्रियों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है। टिकट की होड़ में यात्री 12 घंटे पहले ही रिजर्वेशन विंडो पर आ जाते हैं। कई यात्री तो रात को अपना बिस्तर साथ लेकर आते हैं और यात्री प्रतीक्षालय में रात गुजारते हैं, ताकि सुबह सबसे पहले लाइन में लग सकें।
बड़ा सवाल: क्या बाहर से शिकायत करने आने वालों को भी लगेगा टिकट?
इस घटना ने रेलवे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़ा सवाल यह है कि यदि स्टेशन परिसर या रिजर्वेशन काउंटर के आसपास किसी आम नागरिक के साथ कोई गड़बड़ी या ठगी होती है, और वह इसकी लिखित शिकायत स्टेशन अधीक्षक से या ‘शिकायत पुस्तिका’ में करना चाहता है, तो क्या उसे शिकायत दर्ज कराने का हक पाने के लिए भी पहले प्लेटफ़ॉर्म टिकट का जुर्माना भरना पड़ेगा?
फिलहाल, जुर्माना भरने के बाद पीड़ित शिक्षक ने शिकायत पुस्तिका में अपनी लिखित शिकायत दर्ज करा दी है, लेकिन इस घटनाक्रम ने रेलवे प्रशासन की संवेदनशीलता और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

