मानवता की अनूठी गूँज: अपनों से बिछड़े ‘बेसहारा’ को मिला बकानी का ‘सहारा’


बकानी (झालावाड़)। जहाँ आज की भागदौड़ भरी दुनिया में लोग अक्सर अपनों को भूल जाते हैं, वहीं बकानी कस्बे के जागरूक नागरिकों ने एक अनजान और मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के प्रति अपनत्व दिखाकर मानवता की एक नई इबारत लिखी है। वर्षों से गलियों की धूल छान रहे एक बेसहारा व्यक्ति को मंगलवार को नम आँखों से ‘अपना घर आश्रम’ के लिए विदा किया गया।मुख्य आकर्षण: सेवा और संकल्प की कहानी

  • निस्वार्थ सेवा: समाजसेवी श्याम कुशवाह और महेन्द्र भंडारी जैसे नागरिकों ने न केवल इस व्यक्ति की सुध ली, बल्कि लंबे समय तक उसके भोजन और देखभाल की जिम्मेदारी भी उठाई।

  • प्रशासनिक सहयोग: बकानी थाना अधिकारी रामेश्वर मीणा के सहयोग से कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर उसे उपचार के लिए कोटा भिजवाया गया।

  • भावुक विदाई: जब ‘अपना घर आश्रम’ की एम्बुलेंस उसे लेने पहुँची, तो पूरे कस्बे की आँखें नम थीं। यह आंसू उस संतोष के थे कि अब उस बेसहारे को छत, दवा और सम्मान का जीवन मिलेगा।

  • ​”इंसानियत का सबसे बड़ा धर्म किसी मजबूर के आँसू पोंछना है। बकानी के लोगों ने साबित कर दिया कि समाज अगर ठान ले, तो कोई भी बेसहारा नहीं रहेगा।”

    समाज के लिए एक संदेश

    ​यह घटना हमें याद दिलाती है कि हमारे आसपास मौजूद मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति केवल उपेक्षा के पात्र नहीं, बल्कि स्नेह और उपचार के हकदार हैं। बकानी के इस सामूहिक प्रयास ने यह संदेश दिया है कि एकजुटता ही सबसे बड़ी सेवा है।

    उपस्थित गणमान्य: इस पुनीत कार्य के दौरान श्याम कुशवाह, महेन्द्र भंडारी, मुहम्मद शफीक मंसूरी और संजय जुलानिया सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे, जिन्होंने इस नेक काम में अपना योगदान दिया।

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