सत्ता की मलाई और ‘घर वापसी’ की होड़: बदलती निष्ठाओं का एक व्यंग्यात्मक चित्रण


जगदीश पोरवाल
राजस्थान की राजनीति में हालिया घटनाक्रमों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सत्ता का आकर्षण विचारधारा की सीमाओं से कहीं अधिक प्रबल होता है। हाल ही में सामने आई दो प्रमुख खबरों ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। पहली ओर जहाँ सत्ताधारी भाजपा में ‘राजनीतिक नियुक्तियों’ का काउंटडाउन शुरू हो चुका है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस से बागी हुए नेताओं की ‘घर वापसी’ के प्रयास भी तेज हो गए हैं।
कार्टूनिस्ट अशोक का तीखा कटाक्ष
इन दोनों विरोधाभासी स्थितियों को कार्टूनिस्ट अशोक ने अपने एक कार्टून के माध्यम से बहुत ही मारक ढंग से प्रस्तुत किया है। कार्टून में ‘दलबदलू’ नेताओं की उस मनोदशा को दर्शाया गया है, जो केवल पद और प्रतिष्ठा के भूखे हैं।
दोनों तरफ सट्टा का लोभ
नियुक्ति की आस और बढ़ती बेचैनी: भाजपा की खबर के अनुसार, विभिन्न बोर्डों, निगमों और आयोगों में नियुक्तियों को लेकर मंथन जारी है। कार्टून में एक भाजपा नेता को यह पूछते हुए दिखाया गया है कि जो लोग ‘हाथ’ (कांग्रेस) छोड़कर ‘फूल’ (भाजपा) में आए थे, उनकी क्या स्थिति है। यह उन नेताओं पर सीधा प्रहार है जिन्होंने सत्ता की आस में अपनी पुरानी पार्टी छोड़ी थी।
‘दूसरी लिस्ट’ का विकल्प: कार्टून का सबसे व्यंग्यात्मक हिस्सा वह है जहाँ एक नेता कहता है कि यदि भाजपा की नियुक्ति वाली ‘पर्ची’ में नाम नहीं आया, तो वे कांग्रेस की ‘घर वापसी’ वाली लिस्ट में नाम लिखाने की तैयारी कर रहे हैं। यह इस हकीकत को बयां करता है कि आज के दौर में नेताओं के लिए पार्टियां केवल एक स्टेशन की तरह हैं—जहाँ फायदा दिखे, वहीं का टिकट कटा लो।
निष्ठा बनाम अवसरवाद: एक ओर खबरें बता रही हैं कि पार्टियों में समर्पित कार्यकर्ताओं को तवज्जो दी जाएगी, वहीं दूसरी ओर ‘बागी’ नेताओं की वापसी के लिए अनुशासन समितियों की बैठकें हो रही हैं। यह दोहरा मापदंड आम कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी सवाल उठाता है।

राजनीति केवल ‘पर्ची’ और ‘नियुक्ति’ के इर्द-गिर्द सिमट गई

कुल मिलाकर, कार्टूनिस्ट अशोक का यह रेखांकन आज की ‘सुविधा की राजनीति’ का आइना है। यह दर्शाता है कि कैसे विचारधारा अब केवल भाषणों तक सीमित रह गई है और वास्तविक राजनीति केवल ‘पर्ची’ और ‘नियुक्ति’ के इर्द-गिर्द सिमट गई है। यदि एक दरवाजे पर दस्तक देने से फल नहीं मिलता, तो नेता तुरंत पुराने घर का दरवाजा खटखटाने में संकोच नहीं करते।

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