श्रमिक संगठनों ने केंद्र की ‘श्रमिक विरोधी’ नीतियों के खिलाफ राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

भवानीमंडी (जगदीश पोरवाल)। केंद्रीय श्रमिक संगठनों के देशव्यापी आह्वान पर मंगलवार को स्थानीय श्रमिक संगठनों ने केंद्र सरकार की कथित श्रमिक विरोधी नीतियों और दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में श्रमिक आंदोलनों के दमन के विरोध में राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन उपखंड अधिकारी (SDM) श्रद्धा गोमे को सौंपा।

प्रमुख मांगें और आरोप

​ज्ञापन में श्रमिक नेताओं ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों से भारतीय श्रम परिषद की एक भी बैठक नहीं बुलाई गई है। संगठनों का मुख्य विरोध सरकार द्वारा लागू की गई चार नई श्रम संहिताओं (Labour Codes) को लेकर है, जिन्हें वे पूरी तरह से श्रमिक हितों के खिलाफ मान रहे हैं।

​श्रमिकों ने ज्ञापन में निम्नलिखित बिंदुओं पर चिंता जताई:

  • न्यूनतम मजदूरी: देश के विभिन्न राज्यों में न्यूनतम मजदूरी की दर बहुत कम है, जिससे श्रमिकों का गुजारा मुश्किल हो रहा है।
  • वेतन विसंगति: कर्मचारियों को समय पर वेतन और ओवरटाइम का भुगतान नहीं मिल रहा है।
  • ठेका प्रथा और सुरक्षा: सामाजिक सुरक्षा में कटौती की जा रही है और ‘ठेका प्रथा’ को बढ़ावा देकर श्रमिकों का शोषण किया जा रहा है।

दमनकारी कार्रवाई की निंदा

​ज्ञापन में विशेष रूप से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (गुरुग्राम, भिवाड़ी, नोएडा, फरीदाबाद) में चल रहे श्रमिक आंदोलनों का जिक्र किया गया। नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र द्वारा कॉर्पोरेट के इशारे पर श्रमिकों के शांतिपूर्ण आंदोलन को बर्बरता से कुचलने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की।

इन संगठनों ने जताई एकजुटता

​ज्ञापन सौंपने के दौरान विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:

  1. करण सिंह चौहान (अध्यक्ष, एटक – AITUC)
  2. भरत मीणा (अध्यक्ष, सीटू – CITU)
  3. का. घांसीलाल घडोनिया (अध्यक्ष, ऐक्टू – AICTU)

​श्रमिक नेताओं ने राष्ट्रपति से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और श्रमिक विरोधी कानूनों को वापस लेने की मांग की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!