जगदीश पोरवाल (कार्टून लोक )
जहाँ एक ओर सूरज देवता अपनी पूरी ‘तपस्या’ से धरती को भूनने की तैयारी में हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग ने भी अपनी फाइलें गर्म कर दी हैं। ताज़ा खबर यह है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश में कटौती कर दी गई है और स्कूल अब 20 जून से ही अपने द्वार खोल देंगे।
गुरुजी का ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ और बच्चों की उम्मीद
शिक्षा संकुल में आज एक अनोखा मंजर देखने को मिला। जब तर्क और ज्ञापन काम नहीं आए, तो शिक्षकों ने सीधा ‘ऊपर वाले’ से संपर्क साधने का फैसला किया। “सद्बुद्धि यज्ञ” के धुएं के बीच गुरुजी यह प्रार्थना कर रहे हैं कि विभाग को थोड़ी ठंडक मिले और उन्हें भी।
कार्टूनिस्ट अशोक ने इस स्थिति को बड़ी ही मासूमियत और मारक अंदाज़ में पेश किया है। कार्टून में दो छात्र आपस में बात कर रहे हैं:
- छात्र 1: “सुना तुमने, स्कूल 20 जून से खुल रहे हैं, हमारी गर्मी की छुट्टियाँ कम कर दीं।”
- छात्र 2: “चिंता मत कर दोस्त… गुरुजी पूरी कोशिश कर रहे हैं।”
पीछे गुरुजी हाथ में “सद्बुद्धि यज्ञ” का पोस्टर और अखबार लिए खड़े हैं, जिसकी सुर्खी है—‘ग्रीष्मकालीन अवकाश में कटौती’। उनके चेहरे के भाव बता रहे हैं कि यज्ञ की आहुति में शायद वे अपनी छुट्टियों की बलि चढ़ते देख रहे हैं।
यज्ञ बनाम आदेश
शिक्षकों का कहना है कि जून की झुलसाती धूप में स्कूल खोलना ‘अव्यावहारिक’ है। अब देखना यह है कि शिक्षकों के यज्ञ की आहुति में ज्यादा दम है या विभाग के उस आदेश में जिसने छुट्टियों पर कैंची चला दी है।
एक तरफ हनुमान चालीसा का पाठ हो रहा है, तो दूसरी तरफ विभाग अपने ‘शिविरा पंचांग’ पर अड़ा है। छात्रों को अब बस एक ही उम्मीद है—कि गुरुजी का यज्ञ इतना सफल हो जाए कि विभाग को ‘सद्बुद्धि’ आए, वरना 20 जून से बस्ता टांगकर लू के थपेड़ों के बीच ‘क से कबूतर’ नहीं, ‘ग से गर्मी’ का पाठ पढ़ना पड़ेगा।
विशेष टिप्पणी: अशोक का यह कार्टून उस कड़वी सच्चाई को दर्शाता है जहाँ नीतियां एयर-कंडीशंड कमरों में बनती हैं, लेकिन भुगतनी 45 डिग्री के तापमान में पड़ती हैं।

