जगदीश पोरवाल
राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर जहां एक ओर सरकारी अभियान लगातार “महिला सशक्तिकरण” और “महिला क्रंदन अभियान” जैसे नारों से माहौल सजाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीन पर हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। इसी विडंबना को प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट अशोक ने अपने ताजा कार्टून के माध्यम से बेहद मार्मिक और चुभते अंदाज में उकेरा है।
कार्टून में एक महिला दूसरी महिला से पूछती दिखाई देती है — “कौन सी रिपोर्ट पढ़ रही हो बहन?”
इसके जवाब में दूसरी महिला के हाथ में दो अखबार हैं, जिनमें एक पर लिखा है — “NCRB रिपोर्ट: महिला अपराधों में राजस्थान अव्वल” और दूसरे पर — “दुष्कर्म अपराध में रेड जोन अलर्ट में प्रदेश”। ऊपर बड़े अक्षरों में लिखा है — “महिला क्रंदन अभियान की…”।
दरअसल यह व्यंग्य सीधे उस सरकारी दावों पर चोट करता है, जिनमें महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े विज्ञापन और योजनाएं दिखाई जाती हैं, लेकिन NCRB के आंकड़े और अखबारों की सुर्खियां उन दावों की पोल खोल देती हैं।
महिला उत्पीड़न के मामलों में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि
हाल ही में प्रकाशित खबर में बताया गया कि राजस्थान महिला अपराधों के मामलों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। जयपुर जैसे शहर महिलाओं के लिए असुरक्षित शहरों की सूची में ऊपर पहुंच रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में महिला उत्पीड़न के मामलों में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। दुष्कर्म, अपहरण, साइबर ब्लैकमेलिंग और घरेलू हिंसा के मामलों ने आम महिलाओं की चिंता बढ़ा दी है।
“महिला सशक्तिकरण”
व्यंग्य का सबसे तीखा पहलू यह है कि “महिला सशक्तिकरण” जैसे सरकारी अभियानों की जगह अब महिलाएं खुद “महिला क्रंदन अभियान” महसूस करने लगी हैं।
महिलाओं की सुरक्षा आज भी चुनावी भाषणों और विज्ञापनों तक सीमित नजर आती है।
“अपराध रिपोर्ट” नहीं, बल्कि “सुरक्षित राजस्थान
कार्टून यह सवाल छोड़ जाता है कि आखिर कब तक महिलाओं की सुरक्षा सिर्फ रिपोर्टों, हेल्पलाइन नंबरों और पोस्टरों में ही दिखाई देती रहेगी? और कब ऐसा समय आएगा जब किसी महिला के हाथ में “अपराध रिपोर्ट” नहीं, बल्कि “सुरक्षित राजस्थान” की खबर होगी।

