नगर का 157वां नेत्रदान, शोक में भी परोपकार का साहसिक निर्णय
भवानीमंडी, 10 मई 2026
दुख की घड़ी में भी दूसरों के जीवन में उजाला भरने का एक प्रेरणादायक उदाहरण भवानीमंडी नगर में सामने आया है। अनाज व्यापारी स्व. रामगोपाल पालीवाल के नेत्रदान से दो नेत्रहीनों को नई नेत्र ज्योति मिलेगी। यह भवानीमंडी नगर का 157वां नेत्रदान है।
दुर्घटना के बाद भी परिवार ने दिखाया साहस
भारत विकास परिषद एवं शाइन इंडिया फाउंडेशन के नेत्रदान संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल ने बताया कि मंगलवार को रामगोपाल पालीवाल किसी विवाह समारोह में शामिल होने रायपुर जा रहे थे। रास्ते में मोटरसाइकिल दुर्घटना में उनके सिर पर गंभीर चोट लगी। उन्हें पहले राजकीय चिकित्सालय भवानीमंडी, फिर एसआरजी हॉस्पिटल झालावाड़ ले जाया गया। तीन दिन तक चले चिकित्सकीय प्रयासों के बाद भी शनिवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।
अप्रत्याशित हादसे से स्तब्ध परिवार ने इस गहरे शोक में भी मानवता का परिचय दिया। पुत्र योगेश पालीवाल, जो पहले से ही भवानीमंडी के नेत्रदान कार्यक्रम से जुड़े हैं, ने अपनी माता कन्या बाई, काका पुरुषोत्तम पालीवाल और बहन रजनी पालीवाल से पिता के नेत्रदान की चर्चा की। परिवार की स्वीकृति के बाद समाजसेवी गोविंद गुप्ता की सूचना पर कोटा से शाइन इंडिया फाउंडेशन व ईबीएसआर बीबीजे चैप्टर की टीम ज्योति-रथ से झालावाड़ पहुंची।
गर्मी में समय कम, फिर भी नेत्रदान करवाया
गर्मी के मौसम में नेत्रदान के लिए समय कम उपलब्ध हो पाता है। इसे देखते हुए परिवार ने नेत्रदान प्रक्रिया झालावाड़ में ही संपादित करवाने का निर्णय लिया। परिवारजनों की उपस्थिति में कॉर्निया प्राप्त किया गया। इसके बाद पोस्टमार्टम हुआ और परिवार पार्थिव शरीर लेकर करीब 2 घंटे की देरी से भवानीमंडी लौटा। प्रक्रिया में प्रदीप, दिलीप, संजय पालीवाल आदि ने सहयोग किया।
डॉ. कुलवंत गौड़ के अनुसार नेत्रदानी रामगोपाल पालीवाल का कॉर्निया अच्छी स्थिति में पाया गया है। इसे आई बैंक जयपुर भिजवा दिया गया है, जहां यह दो असहाय नेत्रहीनों के जीवन में रोशनी भरेगा।
नगर में हो रही सराहना
यह भवानीमंडी नगर से 157वां नेत्रदान है। दुख के इस कठिन समय में परिवार द्वारा लिए गए इस साहसिक निर्णय की पूरे नगर में सराहना हो रही है। मृत्यु के अंधेरे में भी रोशनी का उजाला फैलाने वाला यह कदम नेत्रदान की मुहिम को और मजबूती दे रहा है।
