जावरा की आत्मीयता ने जीता राज्यपाल का दिल“यहां आते ही परिवार जैसा अपनापन महसूस होता है” — थावरचंद गेहलोत

बंशीलाल पोरवाल ( जावरा ) मध्यप्रदेश के निवासी व कर्नाटक के राज्यपाल ने जावरा प्रवास के दौरान क्षेत्रवासियों के स्नेह, प्रेम और आत्मीयता की खुलकर सराहना करते हुए कहा कि जावरा की मिट्टी में ऐसा अपनापन है, जो उन्हें हर बार यहां आने के लिए प्रेरित करता है।

उन्होंने कहा कि जावरा पहुंचते ही उन्हें परिवार जैसा माहौल महसूस होता है। राज्यपाल एक सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने जावरा पहुंचे थे। इस दौरान होटल गोल्डन लीफ पर उनका भव्य स्वागत किया गया। डॉ. दिलीप शाकल्य परिवार सहित विभिन्न सामाजिक संस्थाओं, गणमान्य नागरिकों और समाजजनों ने पुष्पमालाओं एवं अभिनंदन के साथ उनका स्वागत किया।

पूरे आयोजन के दौरान उत्साह और उल्लास का वातावरण बना रहा।अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति शिक्षा, संस्कार और एकता से होती है। उन्होंने युवाओं से सकारात्मक सोच अपनाने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों का समावेश भी आवश्यक है, तभी समाज मजबूत और समृद्ध बन सकता है।राज्यपाल ने समाज में भाईचारे, सौहार्द और सहयोग की भावना को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि जब सभी लोग मिलकर कार्य करते हैं, तभी विकास की नई संभावनाएं जन्म लेती हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता और पारस्परिक सहयोग ही किसी भी क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत होती है।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा राज्यपाल का सम्मान भी किया गया। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, समाज के वरिष्ठजनों एवं नागरिकों ने क्षेत्र के विकास और जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी चर्चा की।अपने उद्बोधन के अंत में राज्यपाल ने जावरा की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यहां के लोगों का प्रेम और आत्मीय व्यवहार हमेशा उनके हृदय में बना रहेगा और यही स्नेह उन्हें बार-बार जावरा आने के लिए प्रेरित करता है।

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