पांच राज्यो का चुनावी ‘रिजल्ट’ , हार-जीत के बीच व्यंग्य की पिचकारी



जगदीश पोरवाल

हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणामों ने जहां राजनेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं, वहीं कार्टूनिस्ट अशोक की कूची ने इन नतीजों के ‘साइड इफेक्ट्स’ को बड़े ही चटखारे लेकर कागज़ पर उतारा है। सत्ता के गलियारों में जो बातें दबी जुबान में हो रही थीं, अशोक के कार्टूनों ने उन्हें चौराहे पर ला खड़ा किया है।
दीदी का ‘ठीकरा’ और केरल का ‘सहारा’
कार्टूनों की श्रृंखला में सबसे पहले पश्चिम बंगाल का रुख किया गया है, जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दफ्तर के बाहर एक नेताजी बड़े ही भोलेपन से पूछ रहे हैं— “दीदी… बोलो… ठीकरा किस पर फोड़ना है?” जाहिर है, हार हो या जीत, राजनीति में ‘ठीकरा’ फोड़ने के लिए किसी न किसी का सिर तो चाहिए ही होता है।
वहीं, केरल में पसीने-पसीने होते एक कांग्रेसी नेता को देखकर ऐसा लगता है मानो वो डूबते को तिनके का नहीं, बल्कि ‘केरल के सहारे’ की तलाश में हों। अशोक ने बड़ी ही बारीकी से दिखाया है कि कैसे दक्षिण के राज्यों में चुनावी नतीजे पुरानी पार्टियों के लिए एक ठंडी फुहार की जगह कड़ी धूप साबित हुए हैं।
तमिलनाडु में ‘एंट्री’ और असम का ‘विश्वास’
तमिलनाडु के कार्टून में अभिनेता से नेता बने विजय चंद्रशेखर की ऐतिहासिक ‘धमाकेदार एंट्री’ पर कटाक्ष किया गया है। यहाँ चुटकी ली गई है कि राजनीति में एंट्री तो ‘स्टाइलिश’ हो सकती है, लेकिन विदाई कैसी होगी, यह तो केवल ऊपरवाला (या मतदाता) ही जानता है।
असम के खंड में एक खुशहाल मतदाता ‘पहले इस्तेमाल किया फिर विश्वास किया’ की तर्ज पर क्षेत्रीय पहचान और स्थिरता की जीत का जश्न मनाता दिख रहा है। ऐसा लगता है कि असमिया चाय की चुस्कियों के साथ विकास का ‘ब्लेंड’ मतदाताओं को खूब रास आया है।
राजस्थान: पड़ोसी के घर की मिठाई पर नजर
सबसे दिलचस्प व्यंग्य राजस्थान के परिप्रेक्ष्य में उभरकर आया है। यहाँ एक भाजपा नेता बड़े ही आत्मविश्वास के साथ माइक पर कह रहे हैं कि पांच राज्यों के इन शानदार नतीजों का सीधा ‘माइलेज’ राजस्थान के आगामी पंचायत और निकाय चुनावों में मिलेगा। इसे कहते हैं— पड़ोसी के घर में बच्चा हुआ है और बधाई राजस्थान में बांटी जा रही है! नेताओं का मानना है कि इन पांच राज्यों की चुनावी लहर इतनी तेज है कि वह मरुधरा के रेगिस्तान में भी ‘कमल’ खिलाने के लिए खाद-पानी का काम करेगी।
पुडुचेरी: ‘डबल इंजन’ की डिमांड
पुडुचेरी को लेकर कार्टूनिस्ट ने सीधा प्रहार किया है। चूंकि यह केंद्र शासित प्रदेश है, इसलिए यहाँ तर्क दिया गया है कि जहाँ नाम में ही ‘केंद्र’ हो, वहां तो ‘डबल इंजन’ की सरकार होना अनिवार्य ही हो जाता है।

कार्टून केवल चित्र नहीं !

अशोक के ये कार्टून केवल चित्र नहीं, बल्कि उन राजनीतिक परिस्थितियों का आईना हैं जहाँ हारने वाली पार्टी बहाने ढूंढ रही है और जीतने वाली पार्टी उस जीत का उल्लास उन राज्यों में भी मना रही है, जहाँ अभी चुनाव हुए ही नहीं। कुल मिलाकर, राजनीति का ‘सर्कस’ जारी है और जनता बस ये देख रही है कि अगला ‘ठीकरा’ किसके सिर पर फटने वाला है।

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