भवानीमंडी। (जगदीश पोरवाल) हाड़ौती संभाग में इन दिनों प्रकृति के दोहरे वार—भीषण गर्मी और तेज अंधड़—के बावजूद मानवता की सेवा का जज्बा कम नहीं हो रहा है। तमाम बाधाओं के बीच शाइन इंडिया फाउंडेशन और आई बैंक सोसाइटी ऑफ राजस्थान (EBSR) के प्रयासों से पिछले 72 घंटों में कोटा, बूंदी और झालावाड़ जिलों में तीन नेत्रदान संपन्न हुए, जो समाज में बढ़ती जागरूकता का प्रमाण हैं।तीन दिनों में तीन महादानसंभाग के अलग-अलग जिलों में शोक की घड़ी में भी परिवारों ने साहस दिखाते हुए दूसरों के जीवन में उजाला करने का निर्णय लिया:
- कोटा (गुरुवार): बजरंग नगर निवासी मानसी खंडूजा के निधन के बाद उनकी माता लीला देवी पिपलानी ने अपनी बेटी की यादों को जीवित रखने के लिए नेत्रदान की सहमति दी।
- झालावाड़ (शुक्रवार): जीतमल धर्मशाला क्षेत्र के कोमल सिंह जैन के आकस्मिक निधन पर उनके भाई बसंत कुमार और पुत्रों (नवीन, दिलीप व लोकेश) ने डॉ. कुलवंत गौड़ के समन्वय से नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी करवाई।
- बूंदी (शनिवार): मंडोवरा चौक निवासी अनिल मंडोवरा के पार्थिव देह से उनके पिता रामकिशन व भाइयों की सहमति पर बूंदी जिला अस्पताल में नेत्रदान संपन्न हुआ।
गर्मी में सावधानी है जरूरी: डॉ. कुलवंत गौड़बीबीजे चैप्टर के कोऑर्डिनेटर डॉ. कुलवंत गौड़ ने बताया कि नेत्रदान में समय और तापमान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने तकनीकी और व्यावहारिक सुझाव साझा किए:
- समय सीमा: गर्मियों में मृत्यु के 6 से 8 घंटे के भीतर नेत्रदान संभव है, लेकिन जितनी जल्दी कॉर्निया संकलित हो, उसकी गुणवत्ता उतनी ही श्रेष्ठ रहती है।
- नमी बनाए रखें: परिजनों को चाहिए कि नेत्रदान प्रक्रिया पूरी होने तक मृतक की आंखों पर गीली पट्टी रखें और उसे हर 30 मिनट में बदलते रहें। इससे कॉर्निया सूखता नहीं है और सफल प्रत्यारोपण की संभावना बढ़ जाती है।
- नेत्रदान किसी भी उम्र में किया जा सकता है।
- यह प्रक्रिया पूरी तरह नि:शुल्क है और इसमें केवल 15-20 मिनट लगते हैं।
- इससे चेहरे पर कोई विरूपता नहीं आती है।
“जब बाहर का तापमान 45 डिग्री के पार हो और धूल भरी आंधियां चल रही हों, ऐसे में नेत्रदान के लिए आगे आना यह दर्शाता है कि हाड़ौती के लोग सेवा के प्रति कितने सजग हैं। यह दान किसी दृष्टिहीन के जीवन का अंधेरा मिटाने में संजीवनी साबित होगा।”— डॉ. कुलवंत गौड़
एक अपील: आप भी बनें ज्योति मित्रसंस्था ने आमजन से अपील की है कि मृत्यु के पश्चात शोक संतप्त परिवार को नेत्रदान के लिए प्रेरित करें। आपकी एक छोटी सी पहल किसी के जीवन में दुनिया देखने का सुख भर सकती है।
मुख्य बिंदु जो आपको जानने चाहिए:

