भवानीमंडी स्थापना दिवस: रस्म अदायगी के बीच छलका दर्द, नेताओं की ‘लचर’ कार्यशैली पर उठे सवाल



भवानीमंडी (जगदीश पोरवाल)। राजस्थान के प्रमुख व्यापारिक केंद्र भवानीमंडी ने अपना 116वां स्थापना दिवस तो मनाया, लेकिन आयोजन में जुटी कम भीड़ और शहर के रुके हुए विकास ने कई विचारणीय प्रश्न खड़े कर दिए हैं। पुरानी सब्जी मंडी स्थित संस्थापक महाराजा भवानी सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर औपचारिकता तो पूरी कर ली गई, लेकिन वक्ताओं के संबोधन में शहर की उपेक्षा का दर्द साफ झलका।

116वां साल और मात्र 16 लोग?

कार्यक्रम की शुरुआत में उपस्थिति इतनी कम थी कि खुद नगर कांग्रेस अध्यक्ष विनय आस्तोलिया ने इस पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, “यह कैसी विडंबना है कि हम 116वां स्थापना दिवस मना रहे हैं और शुरुआत में 16 आदमी भी एकत्रित नहीं हुए।” उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि राजनीति से ऊपर उठकर शहर के बारे में सोचना होगा। आस्तोलिया ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि नए अधिकारी के आते ही नेता और संगठन ‘चमचागिरी’ में लग जाते हैं, जिससे शहर का हित प्रभावित होता है।

जिला न बन पाने की कसक: लचर नेतागिरी का परिणाम

समारोह को संबोधित करते हुए कैलाश चंद्र एडवोकेट ने भवानीमंडी के पिछड़ने के कारणों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा:

ऐतिहासिक मिसाल: उन्होंने पूर्व नेता दीपचंद राठौड़ को याद करते हुए कहा कि वे इकलौते ऐसे नेता थे जो अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठकर नवोदय विद्यालय लेकर आए थे। उनके बाद किसी ने भी ‘एरिया फेवर’ (क्षेत्रीय हित) की बात नहीं की।

दूदू बन गया जिला, भवानीमंडी चूका: एडवोकेट ने पूर्ववर्ती गहलोत सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि जब दूदू जैसे छोटे कस्बे को जिला बनाया जा सकता था, तो भवानीमंडी जैसा सक्षम शहर वंचित क्यों रहा? इसका एकमात्र कारण यहां की ‘लचर नेतागिरी’ है।

शहर के विकास के लिए एकजुटता का आह्वान

कार्यक्रम में दो जेके अरोड़ा, भाजपा मंडल अध्यक्ष प्रदीप जैन, कांग्रेस नेता राजेश गुप्ता करावन, पार्षद हकीम ( अखीम ) खान, राजपूत समाज से खुमान सिंह देवड़ा व उदय सिंह सोनगरा, और सिख समाज से प्रितपाल सिंह,दुर्गाशंकर यादव ठेकेदार सहित संतोष पारीक व संजय श्रीमाल ने भी विचार रखे। सभी ने एक सुर में स्वीकार किया कि निजी स्वार्थों की राजनीति के कारण शहर का सामूहिक विकास थम गया है।तथा सभी ने इस मौके पर स्थापना दिवस की बधाई दी ।

मंच संचालन व आभार:

कार्यक्रम का सफल संचालन महावीर जैन ने किया, जबकि अंत में ओमप्रकाश गुप्ता ने सभी का आभार व्यक्त किया। हालांकि, कार्यक्रम खत्म होने तक संख्या बढ़कर 116 तो पहुंच गई, लेकिन चर्चा का विषय शहर के भविष्य को लेकर की गई ‘चिंतन की कमी’ ही रही।






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