जगदीश पोरवाल
चुनाव आयोग के दावों को धता बताते हुए, ‘लोकतंत्र क्लब’ के गेट पर आजकल अजीब नज़ारा है। अब तक हम सुनते आए थे कि “वोट हमारा, अधिकार हमारा,” लेकिन यहाँ नए नियमों के तहत अब आपको अपना यह ‘अधिकार’ इस्तेमाल करने के लिए भी पहले ‘प्रवेश शुल्क’ यानी सदस्यता रसीद कटानी पड़ेगी।
अशोक का ‘मुफ़्त’ वोट का सपना टूटा
कार्टूनिस्ट अशोक द्वारा उजागर की गई एक घटना में, एक आम आदमी जब चुनाव में वोट डालने गया, तो उसके मन में एक बड़ा सवाल था: क्या उसे “वोट डालने के लिए रुपए मिलेंगे?” (शायद उसने पुरानी परंपराओं के बारे में सुन रखा था!) लेकिन, उसे ज़मीनी हकीकत का सामना तब करना पड़ा जब उसे सीधे ‘केश काउंटर’ पर भेज दिया गया।
लोकतंत्र का ‘केश काउंटर’ खुला,
“रुपए मिलेंगे नहीं.. देने पड़ेंगे!”
जी हाँ, लोकतंत्र अब सिर्फ एक बटन दबाने तक सीमित नहीं है। अब चुनाव का एक नया, कॉर्पोरेट-शैली का मॉडल है। काउंटर पर बैठे मुस्कुराते हुए अधिकारी ने साफ कर दिया, “रुपए मिलेंगे नहीं.. देने पड़ेंगे!” उन्होंने आगे बताया कि, “युवक कांग्रेस के संघटनात्मक चुनाव में सिर्फ सदस्य ही मतदान कर सकते हैं।” और सबसे मज़े की बात? सदस्यता मुफ़्त नहीं है, बल्कि उसके लिए आपको “75 रुपए” की रसीद कटानी होगी।
इस नए नियम ने मतदाताओं को धर्मसंकट में डाल दिया है। वे सोच रहे हैं कि क्या उनका एक वोट, जिसके लिए वे 75 रुपए देंगे, वाकई इतना कीमती है? या फिर, लोकतंत्र का मज़ा अब सिर्फ उन्हीं के लिए है जिनकी जेब में 75 रुपए की रसीद कटाने का ‘दम’ है?
क्या अब वोट के लिए भी ईएमआई?
इस खबर के बाद, अब जनता में यह चर्चा आम है कि क्या भविष्य में चुनाव के लिए ईएमआई (EMI) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी? “सर, इस बार का वोट आप ईएमआई पर ले सकते हैं, अगली बार रसीद कटा दीजिएगा।”
अखबारों में दी गई जानकारी के अनुसार प्रदेश के यूथ कांग्रेस के नेताओं में सक्रियता इतनी की प्रत्येक वोटर को वोट डालने के लिए 75 रुपये की रसीद कटाना आवश्यक है उसके आधार पर प्रतिदिन एक करोड रुपए इकट्ठा हो रहा है ,और सात दिनो में ही 8 करोड रुपए इकट्ठा हो गए जबकि राजस्थान प्रदेश कांग्रेस में पूरे साल का चंदा ही 25 करोड़ होता है ।

