भवानीमंडी। (जगदीश पोरवाल)
किसी भी शहर का समग्र और अलग पहचान वाला विकास तभी संभव होता है, जब वहां के जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के प्रति गहरी संवेदनशीलता रखते हुए विशेष प्रयास करें। केवल रूटीन कार्यों के भरोसे शहरों का भविष्य नहीं बदला जा सकता, बल्कि इसके लिए “एरिया फेवर” यानी क्षेत्र विशेष के लिए योजनाएं खींचकर लाने की क्षमता जरूरी मानी जाती है।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि भवानीमंडी शहर इस दृष्टि से अब तक अपेक्षित लाभ नहीं उठा पाया है। नागरिकों का मानना है कि वर्षों से यहां वही कार्य होते आए हैं, जो प्रशासनिक प्राथमिकताओं के आधार पर स्वतः स्वीकृत होते हैं। इन कार्यों को अक्सर जनप्रतिनिधि अपनी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जबकि हकीकत में वे नगर की आवश्यकता और पात्रता के आधार पर होते हैं।
एरिया फेवर की अवधारणा क्या है?
“एरिया फेवर” वह क्षमता है, जिसमें चुना हुआ नेता अपने क्षेत्र के लिए राज्य और केंद्र स्तर तक अपने क्षेत्र की प्रभावी पैरवी कर विशेष योजनाएं, अतिरिक्त बजट और बड़े प्रोजेक्ट स्वीकृत करवाता है। ऐसा नेता जरूरत पड़ने पर मंत्रालय, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री स्तर तक अपनी बात मजबूती से रखकर अपने क्षेत्र के लिए संसाधन जुटाता है।
भवानीमंडी में बड़े प्रोजेक्ट्स की कमी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर में अब तक कोई बड़ा, कालजयी प्रोजेक्ट नहीं आया, जिसे लंबे समय तक याद रखा जा सके। अपवाद स्वरूप एक जनप्रतिनिधि को छोड़ दें, तो अन्य नेताओं द्वारा विशेष प्रयासों की कमी साफ दिखाई देती है।
इन क्षेत्रों में विकास की दरकार
भवानीमंडी के विकास के लिए कई अहम क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं, जिनमें जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका की अपेक्षा है—
शिक्षा: उच्च स्तरीय कॉलेज और तकनीकी संस्थान कमी के अलावा कन्या महाविद्यालय का खुलना
चिकित्सा: आधुनिक सुविधाओं से युक्त अस्पताल, उप जिला अस्पताल जरूर घोषित हुआ है,जबकि यहां की भौगोलिक स्थिति जिला अस्पताल के खुलने लायक है ।
उद्योग: विशेष रूप से संतरा आधारित प्रोसेसिंग उद्योग
परिवहन: यात्री गाड़ियों का ठहराव स्वतः नहीं मिलते इसके लिए भी कागजी लड़ाई लड़नी पड़ती है ।तब कहीं जाकर कुछ ट्रेनों का ठहराव होता है ।
सड़क नेटवर्क: 8 लेन और नए फोरलेन से मध्यप्रदेश कनेक्शन का हो ना बहुत जरूरी है ।इसके अलावा आरटीओ ऑफिस का खुलना बहुत जरूरी है ।
नगर सौंदर्यकरण: व्यवस्थित शहरी विकास ,अतिक्रमण मुक्त शहर
प्रशासनिक ढांचा: मिनी सचिवालय और न्यायालय विस्तार
खेल सुविधाएं: आधुनिक स्टेडियम
कृषि: संतरा एवं कृषि उपज मंडी का विस्तार
संगठनों की भूमिका पर भी सवाल
शहर में सक्रिय सामाजिक और वैचारिक संगठनों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की चुप्पी को लेकर चर्चा है। नागरिकों का कहना है कि जब भारतीय जनता पार्टी से जुड़े जनप्रतिनिधि सत्ता में हैं, तो ऐसे अन्य संगठनों को भी शहर के हित में पहल करनी चाहिए थी।आरएसएस को भी नगर हित में अपने वीटो पावर का उपयोग करना चाहिए ।
जनता की अपेक्षा
जनप्रतिनिधि इस उम्मीद पर कितना खरा उतरते हैं ?
भवानीमंडी के नागरिक अब केवल सामान्य विकास नहीं, बल्कि विशेष प्रयासों से होने वाले परिवर्तन की उम्मीद कर रहे हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले समय में जनप्रतिनिधि इस उम्मीद पर कितना खरा उतरते हैं।बिकाऊ पार्षद अपने वार्ड व नगर के हितों में सर झुका लेते हैं ।और ज़िताओ भी भूमि पुत्र नहीं , विकास पुत्र हो तभी इस शहर का भला होगा । अन्यथा जो चल रहा है वह तो चलता ही रहेगा ।लेकिन जीतने के बाद सबको भूमि अपनी और खींच लेती है ।
चुने हुए जनप्रतिनिधियों के लिए…….
एक बात खरी जरूर है किंतु सत्य है ….की एक चुने हुए सांसद का काम ट्रेन के ठहराव पर उसको हरी झंडी दिखाकर पूर्ण नहीं हो जाता । झंडी दिखाने का काम तो स्थानीय स्तर के पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी दिया जा सकता है ।
पहली बात तो यह है कि जिन जन प्रतिनिधियों को जनता चुनकर भेजती है यदि उनके सामने अपने नगर के विकास कार्यों के लिए ज्ञापन दिया जाए तो फिर उनके चुनने का मतलब ही क्या है ,उनको तो उल्टा कार्यकर्ताओं से पूछना चाहिए कि आपके यहां पर किस चीज की कमी हो और क्या विकास कार्य हो सकता है ।
नोट : चित्र एआई द्वारा निर्मित काल्पनिक है ।

