झालावाड़ | (जगदीश पोरवाल ) भीषण गर्मी और बढ़ते पारे के बीच जिले में “हीट सेफ झालावाड़” अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण जीवनरक्षक पहल की शुरुआत की गई है। हीट स्ट्रोक (तापघात) के खतरों को कम करने और आपात स्थिति में मरीज की जान बचाने के लिए अब टेको (टारपोलिन असिस्टेड कूलिंग) मेथड का सहारा लिया जा रहा है। यह तकनीक न केवल अस्पतालों में, बल्कि सड़क, गांव और कंस्ट्रक्शन साइट जैसे फील्ड क्षेत्रों में भी अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है।पीएचसी झुमकी में हुआ लाइव प्रदर्शनमुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. साजिद खान के मार्गदर्शन में पीएचसी झुमकी में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहाँ चिकित्सा अधिकारी डॉ. शुभम गिरिराज पाटीदार ने आमजन और मेडिकल स्टाफ को टेको मेथड का लाइव प्रदर्शन कर ट्रेनिंग दी। डॉ. पाटीदार ने बताया कि हीट स्ट्रोक की स्थिति में मस्तिष्क और हृदय जैसे अंगों को क्षति से बचाने के लिए शुरुआती कुछ मिनट यानी “गोल्डन टाइम” बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।क्या है टेको (TECO) मेथड?यह एक सरल और कम खर्चीली तकनीक है जिसमें त्रिपाल (टारपोलिन), बर्फ और ठंडे पानी का उपयोग किया जाता है। मरीज को त्रिपाल पर लिटाकर ठंडे पानी और बर्फ की मदद से शरीर का तापमान तेजी से नीचे लाया जाता है। त्रिपाल को हल्का हिलाने से शरीर के चारों ओर ठंडक का संचार बेहतर होता है, जो मरीज को तुरंत राहत पहुँचाता है।हीट स्ट्रोक में अपनाएं ये 6 कदम (जीवनरक्षक उपाय)
डॉ. शुभम पाटीदार ने प्रशिक्षण के दौरान इन मुख्य बिंदुओं पर जोर दिया:- छाया में स्थानांतरण: मरीज को तुरंत धूप से हटाकर किसी ठंडी जगह पर लिटाएं।
- कपड़े ढीले करना: टाइट कपड़ों को तुरंत ढीला करें ताकि शरीर की गर्मी बाहर निकल सके।
- जल उपचार: पूरे शरीर पर लगातार ठंडा पानी डालें या गीले कपड़े से स्पंजिंग करें।
- आइस पैक्स का उपयोग: गर्दन, बगल और जांघों के पास बर्फ रखें।
- त्रिपाल का प्रयोग: मरीज को त्रिपाल पर लिटाकर हल्का हिलाएं।
- त्वरित रेफरल: प्राथमिक कूलिंग के तुरंत बाद एंबुलेंस से अस्पताल पहुँचाएं।
“बेहोश मरीज को पानी न पिलाएं”प्रशिक्षण में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई कि यदि मरीज बेहोश है, तो उसे कुछ भी पिलाने की कोशिश न करें, क्योंकि इससे पानी फेफड़ों में जा सकता है।
जन-जन तक पहुँचेगी तकनीकइस अभियान का उद्देश्य आम नागरिक को भी इस योग्य बनाना है कि वे अस्पताल पहुँचने से पहले ही मरीज की प्राथमिक सहायता कर सकें। स्वास्थ्य विभाग की यह पहल गर्मी के मौसम में होने वाली जनहानि को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

