एकतरफा आदेश पर घमासान: भूमि अधिग्रहण के खिलाफ जन संघर्ष समिति का मोर्चा, कलेक्टर को सौंपा आपत्ति पत्र

बंशीलाल पोरवाल, जावरा

जावरा। ग्राम भतेड़ा, सुजावता एवं बामनखेड़ी सेजावता क्षेत्र में प्रस्तावित फोरलेन सड़क के लिए चल रही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। जन संघर्ष समिति ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के माध्यम से कलेक्टर रतलाम को विस्तृत आपत्ति पत्र सौंपते हुए 15 जनवरी 2026 को जारी आदेश को एकतरफा बताते हुए तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

समिति का आरोप है कि धारा-11 की अवधि 6 माह बढ़ाने का आदेश बिना प्रभावित किसानों और आपत्तिकर्ताओं को सूचना दिए तथा बिना सुनवाई का अवसर प्रदान किए जारी किया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। समिति ने बताया कि पहले ही जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई जा चुकी थीं, लेकिन उन पर विचार किए बिना ही आगे की कार्रवाई कर दी गई।

आपत्ति पत्र में स्पष्ट किया गया है कि भूमि अर्जन अधिनियम 2013 के तहत धारा-11 के प्रकाशन के एक वर्ष के भीतर धारा-19 का प्रकाशन अनिवार्य होता है। इस मामले में धारा-11 का प्रकाशन 21 नवंबर 2024 को हुआ था, जिसकी वैध अवधि 21 नवंबर 2025 को समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद 15 जनवरी 2026 को 6 माह की अवधि बढ़ाने का आदेश जारी किया गया, जिसे समिति ने विधि विरुद्ध और अवैध बताया है।

समिति ने यह भी आरोप लगाया कि समय-सीमा बढ़ने से किसान न तो अपनी जमीन बेच पा रहे हैं और न ही उस पर ऋण ले पा रहे हैं, जिससे उनके आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।

जन संघर्ष समिति ने अपनी प्रमुख मांगों में 15 जनवरी 2026 के आदेश को तत्काल निरस्त करने, सभी आपत्तियों पर विधिसम्मत सुनवाई कर निराकरण करने, तथा यदि 21 मई 2026 तक धारा-19 का प्रकाशन नहीं होता है तो पूरी अधिग्रहण प्रक्रिया को स्वतः निरस्त घोषित करने का प्रमाण-पत्र जारी करने की मांग शामिल की है।

साथ ही समिति ने चेतावनी दी है कि भविष्य में किसी भी प्रकार का आदेश जारी करने से पूर्व प्रभावित किसानों और समिति को अनिवार्य रूप से सूचना दी जाए तथा उन्हें सुनवाई का पूरा अवसर प्रदान किया जाए, अन्यथा आंदोलन तेज किया जाएगा।

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